पाकिस्तान का साथ देने पर भारत ने तुर्की और मलेशिया को सुनाई खरी-खोटी
5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए समाप्त कर जम्मू कश्मीर का भारत में पूर्ण विलय कर लिया था। भारत के द्वारा अपने आंतरिक संवैधानिक मामले में फैसला लिए जाने के बाद भी पाकिस्तान को काफी मिर्ची लगी। पाकिस्तान ने दुनिया के अनेक देशों से सहायता देने की कोशिश की मगर कुछ देशों को छोड़कर कोई भी उसके साथ खड़ा नहीं हो सका।
पाकिस्तान को जम्मू कश्मीर के मामले में पहले तो चीन का साथ मिला मगर चीन ने बाद में अपना हाथ पीछे खींच लिया। उसके बाद पाकिस्तान को तुर्की और मलेशिया का साथ मिला। इन दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के भाषण को सही बताते हुए जम्मू कश्मीर पर भारत का कब्जा बताया। जिसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भारत की तरफ से जवाब देते हुए इन दोनों देशों को कड़ा जवाब दिया है।
तुर्की और मलेशिया ने किया पाकिस्तान का समर्थन
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुलेआम जम्मू कश्मीर में जिहाद की बात कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर में विद्रोह को भड़काने के लिए संयुक्त राष्ट्र के मंच का भी पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह कश्मीर के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और वह कश्मीरियों के लिए लड़ते रहेंगे। जब पाकिस्तान को किसी भी देश का समर्थन नहीं मिला तो तुर्की और मलेशिया पाकिस्तान के समर्थन में उतर आए। जिसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दोनों देशों को जवाब देते हुए कहा कि वह पाकिस्तान के इस अनुचित कदम का समर्थन करने से पहले भारत और अपने देश के संबंधों के बारे में अवश्य सोच लें।
विदेश मंत्रालय का जवाब
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जवाब देते हुए कहा कि तुर्की को पहले जमीनी हकीकत से रूबरू हो जाना चाहिए। उसके बाद उसे पाकिस्तान के समर्थन में किसी भी तरह की टिप्पणी करनी चाहिए। कश्मीर पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। भारत ने मलेशिया को भी चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ भी बोलने से पहले उसे दोनों देशों के संबंधों के बारे में सोच लेना चाहिए। उन्होंने एक बार फिर से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को नसीहत दी
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