TDP ने छोड़ा NDA का दामन : सरकार के खिलाफ लाएगी अविश्वास प्रस्ताव
आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने से नाराज तेलुगु देसम पार्टी ने NDA से अलग होने का फैसला लिया है। पार्टी के प्रमुख व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा एक टेली कॉन्फ्रेंस के दौरान यह घोषणा की गई।TDP के सभी सदस्यों ने इस फैसले का समर्थन किया।
लम्बे समय से TDP का आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने का मांग चल रहा था। इसके लिए उन्होंने संसद में विरोध प्रदर्शन भी किया। दिल्ली में TDP के नेताओं ने BJP से अलग होने का ऐलान करते हुए कहा कि BJP ने जनता से वादा तोड़ा है।
सोमवार को संसद में पेश किया जायेगा अविश्वास प्रस्ताव:-
TDP के एक सांसद थोटा नरसिम्हन ने कहा कि हमारी पार्टी सरकार के खिलाफ सोमवार को संसद में अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। बता दें सरकार के मोदी सरकार के खिलाफ संसद में यह पहला अविश्वास प्रस्ताव होगा। गौरबतल है कि पार्टी सोमवार को संसद में अलग से अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी और उसे वाईएसआर कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है।
लेकिन फिर भी अविश्वास प्रस्ताव संसद में पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का हस्ताक्षर होना जरुरी होता है जबकि, TDP के पास सिर्फ 16 और वाईएसआर के पास बस 9 सदस्य हैं।
क्यों नहीं दिया जा रहा विशेष राज्य का दर्जा?
बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि “आंध्र प्रदेश को सरकार स्पेशल पैकेज देने को तैयार है, लेकिन विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। जटेली का कहना है कि 14वें वित्त आयोग के बाद यह दर्जा उत्तर – पूर्वी और पहाड़ी राज्यों के अलावा किसी और राज्यों को नहीं दिया जा सकता है।
आंध्र प्रदेश के अलावा बिहार, ओडिशा, राजस्थान, व गोवा की सरकारें केंद्र सरकार से लगातार विशेष राज्य के दर्जे की मांग कर रही है।
क्या है विशेष राज्य का दर्जा और किन-किन राज्यों को प्राप्त है?
जिन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त होता है उन्हें नब्बे फिसदी(90%) तक केंद्र से अनुदान मिलता है। पर्वतीय क्षेत्र, अंतराष्ट्रीय सीमा से सटा, प्रति व्यक्ति आय और राजस्व काफी कम आदि विशेष राज्य के दर्जे कि शर्तें हैं।अभी 11 राज्यों को यह दर्जा प्राप्त है:- अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, और असम।
आंध्र सरकार का कहना है कि तेलंगाना के अलग होने से राज्य का राजस्व घटा 16 हजार करोड़ रु हो गया है जबकि, केंद्र के मुताबिक यह घाटा 4 हजार करोड़ का है।
Writer at India Alive


