अयोध्या मामला पर मध्यस्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
अयोध्या मामला – राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के भूमि विवाद को अपनी भावनाओं को आपसी बातचीत से हल करने की पहल पर विचार करने के लिए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। परीक्षण के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद मामले पर कहा कि यह न केवल संपत्ति के बारे में, बल्कि भावना और विश्वास के बारे में भी है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद मामले पर कहा कि पूर्व में हुई चीजों पर नियंत्रण नहीं है।
अयोध्या मामला: सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, इसता के लिए सभी पक्ष ध्यानपूर्वक नाम रखते हैं। हम जल्द ही सुनाना चाहते हैं फैसला।
अयोध्या मामला में सुप्रीम कोर्ट ने आदेशता पर फैसला सुरक्षित रखा |जस्टिस चेंद्रचूड़ ने पूछा था, विनम्रता के फैसले को कैसे लागू करेंगे, करोड़ों लोग हैं, क्या होगा
अयोध्या मामला पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज
अयोध्या मामला की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा, अतीत में जो हुआ उस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है, किसने आक्रमण किया, कौन राजा था, मंदिर या मस्जिद था? हमें वर्तमान विवाद के बारे में पता है। हम केवल विवाद को सुलझाने के बारे में चिंतित हैं।
जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा, यह भावनाओं, धर्म और विश्वास के बारे में है। हम विवाद की शुद्धता के प्रति सचेत हैं।
अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हिंदू महासभा ने किया मुकदमाता का विरोध| सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले को अदालतता में आपसी बातचीत से हल करने की पहल पर विचार करने को लेकर मुकदमा शुरू हो गया है।
हाईकोर्ट ने अयोध्या के विवादित परिसर के जमीन बंटवारे के बारे में पूर्व में जो फैसला दिया था, उसमें सुन्नी सेण्टिंग इंजीनियरिंग वक्फ बोर्ड, निम्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच जमीन का बंटवारा किया गया था, जिसके बाद तीनों पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया।
चुनौती दी थी विवाद में मुख्य मुस्लिम पक्षकार उत्तर प्रदेश सुन्नी सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड सहित सभी प्रमुख मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन, राजू राम चन्द्रन, शकील अहमद, दुष्यंत दबे आदि ने 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट – इस बाबत हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की याचिका पर आपसी बातचीत की। से विवाद को हल करने पर अपनी सहमति दे दी है।
इसी क्रम में विवाद से जुड़े प्रमुख हिंदू हिंदू पक्षकार निर्मोही अखाड़ा ने भी बातचीत से विवाद के हल के लिए सुप्रीम कोर्ट में 26 फरवरी को सुनवाई के दौरान ही सहमति दे दी थी। लेकिन एक अन्य प्रमुख हिंदू हिंदू पक्षकार रामलला विराजमान ने विवाद को बातचीत से हल करने की पहल पर सहमति नहीं दी है। चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की शीर्ष वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सुनवाई के दौरान सुझाव दिया था कि यदि विवाद का सहमति के आधार पर समाधान खोजने की एक प्रतिशत भी संभावना हो तो संबंधित पक्षकारों को चुनौती देने का रास्ता अपनााना चाहिए।
एक अन्य हिंदू हिंदू पक्षकार हिन्दू महासभा आपसी बातचीत से विवाद के हल के लिए तैयार नहीं है। हिन्दू महासभा के वकील हरीशंकर जैन एडवोकेट ने ‘हिन्दुस्तान’ से कहा कि आपसी बातचीत से विवाद का हल करने का मतलब होगा अयोध्या के विवादित परिसर में मुसलमानों को जमीन का कुछ हिस्सा देने पर राजी होना चाहिए। इसके लिए हिन्दू महासभा कतई तैयार नहीं है, हम इसका विरोध करेंगे।
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Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy



