सबरीमाला मंदिर में दर्शन कर सकेंगी महिलाएं
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर एक बड़ा फैसला दिया है । सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि सबरीमाला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाएं दर्शन करने के लिए प्रवेश कर सकती हैं । यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 5 सदस्यों के संवैधानिक बेंच के द्वारा 4-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया गया ।
अपने फैसले को महिलाओं के हक में सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे धर्म और संस्कृति में महिलाओं का स्थान आदरणीय है । उन्होंने कहा कि हमारे धर्म में महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और दूसरी तरफ उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोका जाता है ।
सुप्रीम कोर्ट में फैसले को पढ़ते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि प्रभु अय्यप्पा के भक्त हिंदू भी हैं । ऐसे में एक अलग प्रकार का धार्मिक संप्रदाय बनाया जाना उचित नहीं है । उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 26 के अनुसार प्रवेश को बैन करना उचित नहीं है । संविधान किसी भी प्रकार से पूजा में भेदभाव नहीं करता । उन्होंने आगे कहा कि किसी भी धर्म के नाम पर पुरुषवादी सोच सही नहीं है । उम्र के आधार पर मंदिर में प्रवेश करने से रोका जाना धर्म का हिस्सा नहीं है ।
गौरतलब है कि शीर्ष कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी जिसमें उस प्रावधान को चुनौतीपूर्ण करार दिया गया । जिसके तहत मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु वर्ग के महिलाओं के प्रवेश पर अब तक रोक लगाया गया हुआ था ।
इससे पहले सबरीमाला मंदिर मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनके सलाहकार राजू रामचंद्रन ने कहा था कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर बैन लगाना ठीक उसी प्रकार से है जैसे कि दलित के साथ छुआछूत का हुआ मामला ।
गौरतलब है कि संविधान के द्वारा छुआछूत के खिलाफ सभी को सुरक्षा मिला हुआ है । जाति समुदाय धर्म और लिंग के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का कोई भी भेदभाव नहीं किया जा सकता । इससे पहले केरल के हाईकोर्ट ने अपने फैसले को सुनाते हुए इस बात को सही ठहराया था कि महिलाओं का मंदिर में प्रवेश नहीं होना चाहिए क्योंकि मंदिर में प्रवेश प्राप्त करने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन 41 दिन पहले से ही करना होता है और मासिक धर्म के कारण महिलाएं पवित्रता का पालन नहीं कर पाती ।

