जाने आखिर क्या है क्रिसमिस मनाने के पीछे की मान्यता
इसमें कोई शक नहीं कि क्रिसमिस ईसाई धर्म के लोगो के लिए सबसे बड़ा त्यौहार है. इसलिए आज हम आपको क्रिसमिस मनाने के पीछे की मान्यता के बारे में बताएंगे. जी हां आज हम आपको बताएंगे कि वास्तव में क्रिसमिस के त्यौहार का ईसाई धर्म के लोगो के लिए इतना ज्यादा महत्व क्यों है. हमें यकीन है कि इस जानकारी को पढ़ने के बाद आप भी ये बात समझ जायेंगे कि आखिर क्रिसमिस मनाने की पीछे की मान्यता क्या है और यह त्यौहार क्यों मनाया जाता है. बहरहाल मान्यताओं के अनुसार क्रिसमिस के दिन यानि पच्चीस दिसंबर को ही ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह का जन्म हुआ था.
क्रिसमिस मनाने के पीछे की मान्यता..
गौरतलब है कि ईसाई धर्म का मुख्य ग्रंथ बाइबल है. जिसमे कही भी ईश्वर के स्वरूप का दार्शनिक विवेचन नहीं मिलता. इसके इलावा बाइबल के उत्तरार्द्ध से यह पता चलता है कि ईसा मसीह ने ईश्वर के बारे में एक नया ही विचार दिया है. जिसके अनुसार एक ही ईश्वर में तीन व्यक्ति होते है और तीन व्यक्ति पिता, पुख और पवित्र आत्मा है. जी हां ईसा मसीह का कहना है कि ये तीनो एक ही रूप के अंश होते है. इसलिए ये अपने आप में ही बेहद शक्तिमान होते है. वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि ईसाई धर्म ज्यादातर प्रेम भावना पर ही अधिक जोर देता है.

वही ईसाई धर्म के अनुयायियों के अनुसार ईश्वर के पुत्र ईसा मसीह ने मर कर मानव जाति के सभी पापो का प्रायश्चित किया था. गौरतलब है कि ईसा मसीह ज्यादातर ईश्वर के राज्य की चर्चा करते थे. यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो ईसा मसीह के अनुसार इस धरती पर भगवान् की सत्ता सबसे ज्यादा बलशाली होती है. यही वजह है कि वह ईश्वर को पिता और खुद को भगवान् का पुत्र कहते थे. इसके इलावा धार्मिक महत्व के अनुसार ईसा के जन्म को लेकर चार सिद्धांत दिए गए है. जिनमे से केवल दो सिद्धांतो का ही विवरण मौजूद है.
बहरहाल पहले सिद्धांत यानि ल्यूक एक्ट के अनुसार ईसा का परिवार नाजरथ शहर में रहता था. जो बड़ी लम्बी यात्रा करने के बाद ही बेथलहम पहुंचा था. जहाँ ईसा ने जन्म लिया था. गौरतलब है कि ईसा के जन्म के बाद परियों ने उसे मसीहा कहा था. इसके बाद ग्वालो का दल उनकी प्रार्थना के लिए वहां आ पहुंचा. यही ईसा के जन्म की कहानी है. हालांकि ये कहानी अधूरी है या पूरी, ये तो केवल इतिहास के पन्नो में झाँक कर ही पता किया जा सकता है.
बहरहाल क्रिसमिस मनाने के पीछे की मान्यता केवल ईसा मसीह को याद करना है और उनका शुक्रिया अदा करना है.
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



