गेस्ट हाउस कांड के बाद अब हुआ सियासी बदलाव
बसपा सुप्रिमो मायावती ने चुनावी गठबंधन के एक महीने भीतर ही सुप्रिम कोर्ट से सपा सुप्रिमो मुलायम सिंह यादव के खिलाफ केस वापस ले लिया है। 1995 में हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद से करीब ढाई दशक तक यह दुश्मनी चली। हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों से पूर्व सपा और बसपा ने जनता के सामने यह जाहिर करने की कोशिश की कि उनकी ढाई दशक पुरानी दुश्मनी खत्म हो गई है। अब यह दुश्मनी खत्म हुई है या नहीं परंतु बसपा सुप्रिमो मायावती ने अपनी ओर से दाखिल किए गए मुकदमे को औपचारिक रूप से वापस लेकर उसे अवश्य खत्म कर दिया है। दोनों पार्टियों ने 1993 में एक दूसरे के साथ गठबंधन किया था।

कांड के कुछ सालों के बाद दोनों दलों के बीच समझौता होने की संभावना है तो कई दफा बनी। परंतु किसी ना किसी कारणवश उसका स्थगन भी होता गया।
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गेस्ट हाउस कांड?
यह कांड 1995 में घटित हुआ था। बसपा ने उत्तर प्रदेश में सपा की तत्कालीन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। उस दौर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। समर्थन वापस लेने के बाद बसपा का यह आरोप था कि उनके पांच विधायकों का सपा द्वारा गेस्ट हाउस से अपहरण कर लिया गया है। साथ ही उन विधायकों को 50 50 लाख रुपए और मंत्री पद का प्रलोभन भी दिया गया है। इस मामले में बसपा की ओर से आरोप पत्र दाखिल हुआ। जिला न्यायालय में मजिस्ट्रेट ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेने और अभियुक्तों को सम्मन करने का अपना आदेश वापस ले लिया। तत्पश्चात तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट गई। हाई कोर्ट ने भी जिला न्यायालय के फैसले को सही ठहराया।
इस कांड ने दोनों राजनीतिक पार्टियों को एक दूसरे का दुश्मन बना दिया। कभी साथ रहने वाले दोनों पार्टी के राजनेता एक के बाद एक एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी से बिल्कुल भी ना चूकते थे।

