और बढ़ेंगी पेट्रोल और डीजल की कीमतें
सितंबर के महीने में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार आसमान छू रहे है । ग्लोबल विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ने क्रूड ऑयल पर प्रतिबंध पहले से ज्यादा बढ़ा दिए हसि जिसके वजह से ईरान के द्वारा क्रूड ऑयल की होने वाली आपूर्ति पहले से घट सकती है । ईरान के द्वारा की जाने वाली आपूर्ति घटने से तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की संभावना है । वही दूसरे तरफ विश्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने तेल उत्पादन को बढ़ाने से मना कर दिया है । जिसके वजह से तेल की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती है ।
तेल उत्पादक और निर्यातक देशो ने पिछले सप्ताह यह निर्णय लिया कि मौजूदा हालात में ईरान प्रतिबंधों द्वारा प्रतिकूल दृष्टि से प्रभावित है इसलिए ईरान से होने वाली आपूर्ति में बढ़ोतरी के लिए हम तेल उत्पादन बढ़ाने में असमर्थ हैं ।
इस मुद्दे पर सऊदी अरब ने कहा है कि विश्व में तेल के आपूर्ति को लेकर कोई भी समस्या नही है इसलिए हमें अतिरिक्त तेल उत्पादन बढ़ाने की कोई आवश्यकता नही है । सभी देशों को उनके जरूरत के हिसाब से तेल मिल रहा है इसलिए तेल के अतिरिक्त उत्पादन को बढ़ाने की कोई आवश्यकता नही नज़र आ रही है ।
गौरतलब है कि प्रतिबंधों के कारण ईरान से तेल का एक्सपोर्ट तीव्र गति से घट रहा है जिसके वजह से तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए के लिए ओ पी ई सी के फैसले को एक झटके के रूप में माना जा सकता है क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प तेल की कीमतों पर स्थिरता रखने के लिए तेल आपूर्ति को बढ़ाने की माँग कर रहे थे ।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी देखते हुए भारत तेलों के आयात को घटा सकता है । क्योंकि भारत के लिए तेल की बढ़ती कीमतें और रुपये का डॉलर के मुक़ाबले गिरती हुई कीमत यह दोनों एक वृहद समस्या है । भारत ईरान से अधिक मात्रा में तेल खरीदता है साथ ही साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश हैं । इन समस्याओं से निपटने के लिए भारत कड़े कदम उठा सकता है साथ ही तेल के आयात को कम करने की भी सोच सकता है ।

