एक और जवान की हुई बेरहमी से हत्या
जब दो देशों के बीच युद्ध होता है तो दोनों देश के सैनिक लड़ते है । उस समय भी वह ऐसी बर्बरता और क्रूरता नहीं दिखाते जैसा कि पाकिस्तानियों ने इस बार एक जवान के साथ किया है । भारत और पाकिस्तान इस समय आमने सामने से कोई भी युद्ध नही लड़ रहे है .
सन 1949 में हुई जिनेवा संधि से यह पता चलता है कि कोई भी युद्ध लड़ते वक़्त इंसानियत बरकरार रखनी चाहिए । अगर आप इंसान है तो आपके मरते दम तक आपमे इंसानियत का भाव होना चाहिए । भारत और पाकिस्तान इस समय आमने सामने से कोई भी युद्ध नही लड़ रहे है मगर बी एस एफ के जवान के साथ इतनी क्रूरता के साथ बर्ताव करना कहाँ का इंसानियत है यह हम सभी के लिए एक बहुत बड़ा प्रश्न बनकर उभरा है ।
बी एस एफ की जानकारी के अनुसार 18 सितंबर को एक गश्तीदल सीमा पर लगी बाड़ के पास गया । वहां सरकंडे की घास काफी बढ़ गई थी । जिसके वजह से भारत और पाकिस्तान इंटरनैशनल बॉर्डर को पूर्ण रूप से देख पाने में दिक्कत हो रही थी । गश्तीदल सरकंडा काट कर उस इलाके को साफ करने गया था ।
अचानक पाकिस्तान की तरफ से धुँआधार फायरिंग और गोलाबारी होने लगी । फायरिंग का जवाब सेना ने दिया और वो अपने बाड़ के तरफ लौट आये । कुछ देर पश्चात उन्हें ज्ञात हुआ कि बी एस एफ का जवान नरेंद्र कुमार लापता है ।
बी एस एफ ने कंपनी हेडक्वार्टर से और जवानों को बुलाकर लापता नरेंद्र कुमार को खोजने की कोशिश शुरू की । इसके साथ ही बी एस एफ ने पाकिस्तान रेंजर्स से बात कर उनसे मदद माँगी । नरेंद्र कुमार को खोजना मुश्किल था क्योंकि वो जिस इलाके में लापता हुए थे वह इलाका बड़े बड़े घासो से भरा हुआ था । पाकिस्तान रेंजर्स की टीम ने भी कुछ दूर तक बी एस एफ के जवानों की मदद की फिर उन्होंने मदद करने से मना कर दिया ।
काफी देर तक मशक्कत करनी के बाद बी एस एफ ने लापता नरेंद्र कुमार खोज लिया । नरेंद्र कुमार के शरीर में गोलियां लगी थीं । गर्दन, धड़ और पीठ पर भी कई जख्म के निशान थे। ज़ख्म देखकर ऐसा लग रहा था कि उनका सिर को धड़ से अलग करने की कोशिश की गई है । इसके पश्चात पूरी अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है ।
ऐसा घटना पहली बार इसके पहके भी हो चुका है । 2017 के मई में एल ओ सी के पास भारतीय जवानों के शवों के बदशूलकी हुई है ।

