मध्यप्रदेश में चुनावी भट्टी और गरमाई
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव एक विशेष युद्ध का मैदान ले चुका है । इसमें मैदान में कौन सी पार्टी बाजी मारेगी यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन विशेष पार्टियों के भीतर चुनाव से पहले ही हारने और जीतने का खेल तेज हो गया है जिसमें कांग्रेस प्रमुख रूप से है । कांग्रेस के खेमे में नेताओं में एकता की कमी देखी जा रही है ।
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी दो भागों में बांट गई है । एक तरफ प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया है जिन्हें कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी का साथ हासिल हुआ है तो दूसरी तरफ प्रदेश के अध्यक्ष कमलनाथ पूर्व , मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह अकेले खड़े हुए है । मध्यप्रदेश में यह दो खेमे में अलग-अलग कांग्रेस पार्टी के लिए चुनाव रैली और जनसभाएं कर रहे हैं ।
मध्य प्रदेश विधानसभा मध्य प्रदेश की राज्य की शिकायत कुछ इस तरह से है कि कांग्रेस लगभग 15 सालों से सत्ता से बाहर है । उसने कांग्रेस ने राज्य में अभी तक जीत का मुंह नहीं देखा है । वहीं लगातार तीन विधानसभा चुनाव की जीती हुई भाजपा इस बार भी अपने झंडे को मध्यप्रदेश में गाड़ना चाहती है । जिसके लिए वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ साथ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने चुनावी गलियारों में चुनावी रैली और जनसभा करते हुए दिख रहे हैं । गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2019 के लोकसभा चुनाव की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है । यह विधानसभा चुनाव आने वाले सभी चुनावों के लिए एक बहुत बड़ा गेम चेंजर हो सकता है।
मध्य प्रदेश में अपनी जीत का सपना देख रही कांग्रेस पार्टी की आंतरिक लड़ाई से वह उबर नहीं पा रहे हैं । यही कारण है कि अब तक कांग्रेस के द्वारा उम्मीदवारों के नाम भी घोषित नहीं किए हैं। गौरतलब है कि पिछले दौरे पर प्रदेश के अध्यक्ष कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की सक्रियता चुनावी रैलियों में और जनसभाओं में नजर आई। मगर ग्वालियर, चंबल संभाग के राहुल के दौरे में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई ।

