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सरकार राम मंदिर पर निर्णय करें अन्यथा चुनाव में दिखेगा प्रतिकूल परिणाम

अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा । अक्टूबर के अंत में सुप्रीम कोर्ट में इसकी निर्णायक सुनवाई शुरू होने वाली है और इसके पहले ही भारत के साधु-संतों ने मोदी सरकार को चेतावनी दे डाली है ।
गौरतलब है कि दिल्ली में साधु-संतों की उच्चाधिकारी समिति की बैठक हुई । इस बैठक में संतों ने मोदी सरकार को आगाह करते हुए कहा कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले अगर राम मंदिर का निर्माण नहीं किया जाता है तो मोदी सरकार आने वाले चुनाव में हार का मुख देखने के लिए तैयार रहे ।  अगर राम मंदिर के निर्माण के लिए सरकार प्रतिबद्ध नहीं है और कोई डेडलाइन नहीं देती है तो हम संतों के पास केवल आंदोलन और विद्रोह का ही एक मात्र विकल्प बच पायेगा ।
साधु संतों ने राम मंदिर के मामले पर काफी तेज दिखाई ।  महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में संतों का एक प्रतिनिधिमंडल भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिला और एक ज्ञापन सौंपा । ज्ञापन में कहा गया है कि महामहिम अपनी सरकार से कहें कि वह अब कानून बनाकर राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करें क्योंकि आज की परिस्थिति में केवल यही समाधान उपयुक्त  लगता है ।
गौरतलब है कि संतों की बैठक के दौरान विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर के निर्माण पर एक प्रस्ताव पास किया ।  जिसमें बहु प्रतीक्षित राम मंदिर के निर्माण के लिए एक बिल लाने की मांग को दर्शाया गया है । विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि उसके नेतृत्व में संतों के पैनल में राम मंदिर के निर्माण का डेडलाइन ऐसे समय में सरकार द्वारा दिया गया है कि जब कुछ दिन बाद ही अक्टूबर माह के अंत में अयोध्या के केस पर सुनवाई शुरू होने वाली है ।
इधर विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर पर अपना कड़ा रुख व्यक्त करते हुए बयान दिया है कि सरकार राम मंदिर पर जल्द से जल्द निर्णय करें । इस बयान के मुताबिक स्वामी वासुदेवानंद और श्री विश्वेश तीर्थ महाराज ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री को अगर आवश्यकता पड़े तो वह लोकसभा और राज्यसभा का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर राम मंदिर बनवाने के लिए कानून बनाए और राम जन्मभूमि को हिंदुओं के हवाले करें ।

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