बिहार के इस मंदिर में जानवरों की बलि देने के बाद भी जिंदा हो जाते हैं जानवर
प्राचीन काल में बिहार ज्ञान का केंद्र माना जाता था। यहां पर विश्व का सबसे श्रेष्ठ विश्वविद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय था। जहां पर भारत ही नहीं वरन समस्त विश्व के लोग शिक्षा ग्रहण करने के लिए आया करते थे। इस विश्वविद्यालय में विश्व के श्रेष्ठ शिक्षक शिक्षण कार्य किया करते थे। बिहार कई राजाओं की राजधानी भी रहा है। इसके अलावा बिहार के कई ऐसे रहस्य भी हैं जो कि प्राचीन काल से जुड़े हुए हैं। आज हम आपको बिहार के से जुड़े ऐसे ही एक रहस्य के बारे में बताएंगे। एक ऐसा मंदिर जो कि बिहार के कैमूर जिले में स्थित है। ऐसी मान्यता है कि इस जिले में स्थित एक मंदिर पर जानवरों की बलि देने के बाद जानवर वापस जीवित हो जाया करते हैं।
कैमूर जिले में स्थित है मंदिर
बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर के एक पहाड़ी पर मां मुंडेश्वरी देवी का यह मंदिर स्थित है। यह मंदिर बहुत प्राचीन माना जाता है। मगर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनुसार यह मंदिर 635 ईसवी पूर्व का है। इस मंदिर पर जाने के लिए आपको 500 सीढ़ियां चढ़कर 608 फीट ऊपर जाना पड़ेगा। मान्यता है कि मां मुंडेश्वरी देवी यहां पर रक्त हीन बली लेती हैं। जानवरों की बलि की प्रथा यहां पर बहुत प्राचीन काल से ही चली आ रही है। बली के नियम के मुताबिक जब भी यहां पर किसी जानवर को बलि के लिए लाया जाता है तो उसे मां के चरणों में रख दिया जाता है। पुजारी मंत्र पढ़कर उस पर चावल और फूल डालते हैं तो जानवर ऐसे सो जाता है। जैसे उसके प्राण हर लिए गए हों। उसके बाद पूरा मंत्र पढ़ने पर वह जानवर उछल कर खड़ा हो जाता है।
अलग ही तरह का है यह मंदिर
मां मुंडेश्वरी का यह मंदिर अलग ही प्रकार का बना हुआ है। 608 फीट की ऊंचाई पर जाने पर ऐसा लगता है जैसे जहां पर बलि दी जाती हो वह स्थान मंदिर का गर्भगृह हो। आमतौर पर ऊंचाई पर स्थित मंदिरों पर एक भगवा पताका लहराई जाती है। मगर इस मंदिर को देखने पर यह आष्टा कार जैसा प्रतीत होता है जो कि अपने आप में अलग बात है।

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