#MeToo: जुर्म साबित होने पर जानिए क्या है सजा का प्रावधान ?
MeToo में सजा का प्रावधान
आपको बता रहे हैं कि जुर्म साबित होने पर जानिए क्या है MeToo में सजा का प्रावधान ? #MeToo से महिलाओं को ऐसा हौसला मिल गया है कि वह सभी शर्म की सीमाओं को लांघकर अपने साथ हुए दरिंदगी और उत्पीड़न को दुनिया सामने रख रही है| MeToo मुहीम ने समाज में एक आंदोलन का रूप पकड़ लिया है| इस मुहीम के जरिये महिलाएं खुलकर सामने आ रही है और दुनिया के सामने मर्दों द्वारा हुए उत्पीड़न की सच्चाई को दिखा रही है| इस जरिए बहुत लोगो के चेहरे से नकाब उतर गया है तो बहुत लोग के ऊपर गलत आरोप भी लगाए गए हैं | तो आपको बता रहे हैं कि जुर्म साबित होने पर जानिए क्या है MeToo में सजा का प्रावधान ?
छेड़छाड़ से जुड़े कानून
- धारा 354ए :- इस धारा के तहत अगर कोई सेक्सुअल फेवर मांगता है, तो उसे छेड़छाड़ के दायरे में रखा जाता है| अगर आप इस धारा के तहत दोषी पाए जाते हैं तो आपको अधिकतम 3 की सजा हो सकती है|
अगर आप किसी महिला पर गलत टिप्पणी करते पाए जाते हैं , तो आपको एक साल तक की जेल की हवा खानी पड़ सकती है|
- धारा 354बी:- अगर आप किसी महिला के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाते हैं या किसी महिला को जबरदस्ती कपडे उतारने के लिए बाध्य करते हैं, तो इसे भी अपराध मन जाता है| इसके लिए भी आपको अधिकतम 3 साल की सजा हो सकती है|
- 354सी:- किसी महिला की कोई प्राइवेट तस्वीर लेना और शेयर करना बहुत घटिया और संगीन अपराध है| अगर आप इस धरा के तहत दोषी पाए जाते हैं तो आपको एक साल से तीन साल तक की सजा हो सकती है|
- धारा 354डी:- अगर कोई महिला का पीछा करने की कोशिश करता है और उसकी मर्जी के खिलाफ सम्पर्क करने की कोशिश करना चाहता है, तो यह छेड़छाड़ की श्रेणी में आता है| इसके तहत दोषी पाए जाने पर 3 साल की सजा का प्रावधान है|
- 473 धारा:- इस धारा के तहत अदालत चाहे तो शिकायत की समय सीमा को ख़त्म कर सकता है| इसके लिए आपको जरुरी साक्ष्य जुटाने की जरुरत होगी|
उम्रकैद से जेल तक
2013 में बने नए कानून के अनुसार दुष्कर्म के दोषियों को उम्रकैद और छेड़छाड़ के दोषियों को 7 साल तक का प्रावधान है| इससे पहले ये सजा अधिकतम 2 साल की थी|
झूठा आरोप और मानहानि
जो लोग आरोप लगाते हैं उनपर भी कड़ी नजर रखी जाती है| अगर जो इंसान आरोप लगाता है और वो आरोप झूठ निकलता है तो उसके खिलाफ भी केस होता है|धारा 182 के अनुसार मानहानि का केस दर्ज किया है अगर आरोप झूठा होता है तब| इसके तहत आरोपी को बाइज्जत बरी किया जाता है| और इसके तहत आरोपी क्षतिपूर्ति का दवा भी कर सकता है|
जिस केस में सजा 3 से ज्यादा की होती है, उस मामले में पीड़ित के बयान के आधार पर केस दर्ज किया जाता है| इसके तहत पहले साबूत देखा जाता है फिर केस दर्ज किया जाता है|
- धारा 375 के अनुसार ओरल सेक्स और प्राइवेट पार्ट से छेड़छाड़ को दुष्कर्म कहा जाता है|
- अगर कोई इंसान किसी महिला के प्राइवेट पार्ट में कोई चीज या अपने शरीर का कोई अंग डालता है तो उसे भी दुष्कर्म माना जाता है|
- अगर बलात्कार से महिला की मौत हो जाती है या महिला कोमा में चली जाती है, तो फांसी की सजा होती है| रेप के मामले में आरोपी को कम से कम 7 साल की सजा या अधिकतम उम्रकैद होती है|


