क्या आप जानते है कि कलाई पर कलावा क्यों बाँधा जाता है
ये तो सब जानते है कि हिन्दू धर्म में किसी भी पूजा पाठ के दौरान कलाई पर कलावा बांधना बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते है कि आखिर कलाई पर कलावा क्यों बाँधा जाता है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इसके पीछे भी एक नेक वजह छिपी हुई है। हालांकि कुछ लोग इसे मौली भी कहते है। मगर शुद्ध भाषा में इसे कलावा के नाम से ही जाना जाता है। अब जाहिर से बात है कि इस बात का संबंध हमारे हिन्दू धर्म से है, तो ऐसे में कलाई पर कलावा क्यों बाँधा जाता है, इसकी जानकारी हर व्यक्ति को जरूर होनी चाहिए। आपको जानकारी हैरानी होगी कि कलाई पर कलावा बाँधने से कलाई की नसे अक्सर दरुस्त रहती है। जी हां इससे नसों में खून का संचार काफी अच्छे से होता है।

कलाई पर क्यों बांधा जाता है कलावा..
आपने अक्सर देखा होगा कि कलावा आमतौर पर कलाई की नसों पर ही बंधा होता है। यही वजह है इसका सीधा सम्पर्क हमारे मन और हमारी आत्मा के साथ होता है। इसके साथ ही हम आपको बता दे कि नसों में खून का संचार अच्छी तरह से होने से रक्तचाप, हृदय से संबंधित रोग, शुगर और लकवा जैसी बीमारियां होने की संभावना बेहद कम होती है। यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो कलाई पर कलावा बाँधने के कई सारे फायदे है। कहते है कि कलाई पर कलावा बांधते समय अगर मंत्रो का जाप किया जाएँ तो इससे जीवन में आने वाली मुश्किलें दूर हो जाती है। शायद यही वजह है कि जब पंडित जी हमारी कलाई पर कलावा बांधते है तो वह मंत्रो का उच्चारण जरूर करते है।
बता दे कि कलावा का धागा वास्तव में कच्चे सूत से तैयार किया जाता है। जो लाल, पीले, सफेद और नारंगी रंग के होते है। हालांकि आमतौर पर लाल रंग का धागा ही कलाई पर बाँधा जाता है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता रहता है। वही अगर वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाएँ तो कलाई की जिस जगह पर कलावा बाँधा जाता है, वास्तव में वही से ही शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगो तक पहुँचने वाली नसें गुजरती है। मगर साथ ही इस बात का ध्यान भी रखे कि कलाई पर कलावे को ज्यादा जोर से यानि कस कर नहीं बांधना चाहिए। इससे नसों के दबने का खतरा रहता है।
इसे पढ़ने के बाद तो आपको पता चल ही गया होगा कि आखिर कलाई पर कलावा क्यों बाँधा जाता है।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



