मार्कंडेय काटजू ने आरक्षण पर दिया बयान, विरोध में लोग करने लगे नारेबाजी
मार्कंडेय काटजू अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। वह अक्सर कोई न कोई ऐसी बात बोल जाया करते हैं जो कि विवादित रहती है। सेवानिवृत्त जज मार्कंडेय काटजू ने कुछ समय पहले यह कहा था कि राम एक भगवान नहीं बल्कि इंसान थे और जो लोग गाय को माता मानते हैं। उनके दिमाग में गोबर भरा हुआ है। जिसकी वजह से वह विवादों में घिर गए थे। हाल ही में पंजाब के जालंधर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से आरक्षण को लेकर एक ऐसा भाषण दिया जिसके बाद कार्यक्रम में ही लोगों के विरोध में नारेबाजी करने लगे। दरअसल मार्कंडेय काटजू ने कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 128 जयंती पर पंजाब में एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे मार्कंडेय काटजू ने भाषण शुरू करने से पहले ही यह कह दिया था कि वह यहां पर अपने विचारों को रखने जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सियासत को पैसे से प्रेम है ,राष्ट्र से नहीं। इसी कारणवश वह चुनाव में विश्वास नहीं करते हैं। वोट भी अब जाति पर आधारित हो गया है। देश में गरीबी के लिए अपनी आवाज नहीं उठाई जा सकती और अभिव्यक्ति के नाम पर अपनी बात रखने वालों को गिरफ्तार कर लिया जाता है। आगे उन्होंने यह भी कहा कि अगर अनुसूचित जाति के लोग मेहनत करना शुरू कर दे तो उन्हें आरक्षण की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
काटजू के बयान से सहमत होकर लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और उन्हें मंच से उतारने की बात कहकर विरोध करने लगे। इसके बाद पंजाब मजदूर सफाई फेडरेशन के चंदन ग्रेवाल लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। इसके बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर चेतना कमेटी के सुरेंद्र कुमार को मंच पर भाषण के लिए आमंत्रित किया गया। सुरेंद्र कुमार ने डॉक्टर काटजू के बयानों पर खूब भड़ास निकाली और वह यहीं नहीं रुके उन्होंने मंच से नीचे उतर कर काटजू के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।
यह पहली बार नहीं है जब मार्कंडेय काटजू किसी कारण विवादों में आए हैं। वह अक्सर ही ऐसी बातें करते रहते हैं। इसके पहले उन्होंने महात्मा गांधी को ब्रिटिश और सुभाष चंद्र बोस को जापानी एजेंट तक बता दिया था।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



