क्या आप जानते थे अभिनेता जॉन अब्राहम के फूटबाल से ताल्लुकात को?
अभिनेता जॉन अब्राहम जब महज़ एक छोटे बच्चे थे तब से उनका सपना था की वे देश के लिए फूटबाल खेलें| किन्ही कारणों से वे ऐसा तो नहीं कर पाए परन्तु उनका फुटबॉल के प्रति लगाव रत्ती भर भी काम नहीं हुआ| अभिनेता जॉन अब्राहम अपना काफी पैसा और वक़्त लगा के आज कल एक फुटबॉल क्लब को खड़ा करने में लगे हुए हैं|
जॉन का फुटबॉल से जुड़ाव
४६ साल के अभिनेता जॉन अबराहम ५० से ज़्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं| बतौर निर्माता भी उन्होंने कुछ अच्छी मूवीज जनता के सामने पेश की है| मॉडल जैसा दिखने वाला ये इंसान हमेशा से फिल्मी दुनिया से शोहरत नहीं कामना चाहता था| बड़े होते हुए उन्हें भारत का मशहूर फुटबॉल सितारा बनाना था| उनका ये सपना तो पूरा नहीं हो पाया और आज भी अभिनेता जॉन अब्राहम खुद को आकस्मिक अभिनेता या एक्सीडेंटल एक्टर मानते हैं|

जब जॉन के सामने इंडियन सुपर लीग में अन्तर्भावन करे का मौका आया तो वे किसी हाल में मना नहीं कर पाएं| एक कदम आगे जाकर अभिनेता जॉन अब्राहम ने एपीआई खुद का क्लब स्थापित किया|
एक क्लब की स्थापना
जॉन अब्राहम के पास एक शानदार मौका था की वे जहा से ताल्लुक रखते हैं यानी की मुंबई वे वहां की टीम बनाये| लेकिन इस फूटबाल प्रेमी ने अपने क्लब के लिए वो स्थान चुना जहाँ शायद यह खेल देश में सबसे लोकप्रिय व सबसे समान्नित है|
उन्हें नार्थ ईस्ट चुना, एक ऐसी जगह जहाँ से हमारे कई दिग्गज फुटबॉलर्स आये हैं और एक ऐसी जगह जहाँ ज़मीनी तौर पे इस खेल को काफी पसंद किया जाता है| ऐसा कर के उन्होंने ८ राज्यों को साथ में जोड़ दिया एक क्लब से| किसी एक शहर तक अपना क्लब सीमित नहीं रख के जॉन ने एक बड़े इलाके को अपना क्लब भेंट किया|

अभिनेता जॉन अब्राहम अपनी धर्म पत्नी प्रिय जो स्वयम इस क्लब की अध्यक्षिड़ी हैं, के साथ इस सपने के रोज मर्रा के काम काज सँभालते हैं| उन्हें अपने हर खिलाडी की पोजीशन से ले कर चोटों से ले कर हर चीज़ पता रहती है|
अंधविश्वास ही सही
आपको ये जान के ताज्जुब होगा की क्लब के काम काज में इतनी सक्रीय भूमिका निभाने वाले अभिनेता जॉन अब्राहम अपनी टीम के मैचेस देखने नहीं जाते| वे इस मामले में काफी अंधविश्वासी हैं और मानते हैं की ऐसा करने पे उनकी टीम हार जाती है| मैचेस के दौरान उसे खुद देखने की बजाय वे अपनी बीवी से फ़ोन पर उसकी जानकारी लेते रहते हैं|

निष्कर्ष
नार्थ ईस्ट FC की स्थापना काफी म्हणत के बाद २०१३ में हुई और उसने ISL के पांच संस्करणों में भी भाग लिया| कड़ी म्हणत और लगन के बाद इस साल ये टीम प्ले ओफ्फ्स के लिए क्वालीफाई कर गयी| एक ऐसा खेल जिसे भारत में भरपूर ध्यान नहीं मिलता है को इतनी लगन मिलता देख अच्छा लगत है| एक इंसान को अपनी बचपन की कुछ अधूरी चाह को पूरा करते देख अच्छा लगता है|
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