भारत और अमेरिका के रिश्तों के अच्छे दिन, फिर कैसे डगमगाए रिश्ते
भारत और अमेरिका के रिश्तों की कहानी
भारत और अमेरिका के रिश्तों की कहानी कुछ खटी-मीठी है| 13 वर्षों के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आयी है| अमेरिका के माना करने के बाद भी भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का सौदा किया है| इसके बाद अमेरिका के धमकी देने के बाद भी भारत ईरान से तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत जारी रखा है| जिसपर अमेरिका की तीखी नजर है| तो आइये जानते हैं अमेरिका और भारत के रिश्तों का एक संक्षिप्त विवरण|
आजादी के बाद से भारत और अमेरिका का रिश्ता विश्वासपूर्ण नहीं रहा| तब शीत युद्ध चल रहा था| भारत हमेसा से शीत युद्ध को तवज्जों नहीं दिया| फिर भी दोनों देशों के बीच बातचीत होती रही|
1954 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को भारी सैनिक सहायता देने देने की बात की , इससे दोनों देशों के रिश्तों में फिर से दरारें आयी| 1971 में पाकिस्तान-भारत के तीसरे युद्ध में अमेरिका ने मध्यस्थ की भूमिका निभाकर पाकिस्तान का मदद किया| फिर से भारत ने पाकिस्तान से दूरियां बनाईं|
परमाणु परीक्षण
1974 में भारत ने अमेरिका के इच्छा के विपरीत परमाणु परीक्षण में शामिल हुआ इससे रिश्ते में फिर से दरार पैदा हुई|
1978 में भारत के प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई अमेरिका यात्रा पर गए| उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर भारत आए और भारत के संसद को संबोधित किया| उस वक़्त दोनों देशों के रिश्तों के बीच में थोड़ी गर्माहट आयी|
अटल बिहारी बाजपेयी जी के सरकार में 1998 में भारत परमाणु परीक्षण किया था| इससे नाराज होकर अमेरिका ने हिंदुस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया था| जिसे भारत ने 4 साल तक झेला| 2001 में यह प्रतिबंध हटाया गया|
1999 में कारगिल युद्ध में अमेरिका ने भारत का साथ दिया जिसकी वजह से पाकिस्तान ने अपनी सेना को सीमा से हटाया|
2005 में दोनों देशों के रिश्तों के बीच एक नए अध्याय की शुरुआत हुई| तब दुनिया से शीत युद्ध समाप्त हो गया था| भारत एक नया बाजार बन रहा था| जिसकी वजह से दुनिया को भारत में संभावनाएं नजर आने लगी| 2005 में अमेरिकी विदेश मंत्री कॉन्डोलीजा राइस भारत के दौरे पर आईं और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पर समझौते हुए।सेना ने साथ मिलकर नौसैनिक युद्धाभ्यास किया| भारत से परमाणु कारोबार पर लगे 30 वर्षों के लिए रोक को अमेरिका ने हटा दिया| 2008 के मुंबई हमले में जाँच के लिए अमेरिका ने एफबीआई की टीम को भारत भेजा|
पहली बार इंडिया-यूएस स्ट्रैटेजिक डायलॉग की नींव 2010 में पड़ी। अमेरिका सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का पुरजोर समर्थन भी किया। तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा ने भारत का समर्थन किया| 2011 में साइबर सिक्योरिटी के लिए भारत और अमेरीका ने एमओयू पर दस्तखत किए, जो आज स्ट्रैटेजिक डायलॉग का हिस्सा है। फिर भारत में 2014 चुनाव के बाद ओबामा ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका का न्योता दिया|


