आरसेप पर भारत का बड़ा बयान
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आरसेप पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल आरसेप से बाहर निकलने का भारत ने निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि आरसेप में शामिल देश अगर भारत की मांगे मानने के लिए तैयार है तो भारत उस पर विचार करेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक संवाददाता को संबोधित करते हुए कहा कि देश के हित में कोई भी प्रस्ताव आएगा तो उस पर निश्चित तौर पर विचार किया जाएगा। विदेश नीति में कोई भी देश अपने हित को लेकर बात करता है और भारत भी वही कर रहा है।

वहीं चीन के प्रवक्ता ने भारत को आरसेप में शामिल होने का आग्रह किया है। साथ ही चीन के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि वह भारत के मांगों पर विचार करने के लिए तैयार हैं। भारत के सभी मांगों पर आपसी सहमति के आधार पर बात की जा सकती है।
आरसेप पर भारत के पास कई बड़ी वजह
आरसेप पर भारत का बड़ा बयान, उसकी कई वजहों को उजागर करता है। अगर भारत आरसेप का हिस्सा बनता तो देश में सस्ते आयात की बाढ़ की आशंका थी। साथ ही भारत अपने उद्योगों को संरक्षण देने के साथ-साथ अन्य देशों में भारतीय उत्पादों की पहुंच को बढ़ाना चाहता है। इसी कारण भारत ने रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनामिक पार्टनरशिप अर्थात आरसेप में अपने हिस्सेदारी खत्म करने का निर्णय लिया।
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भारत का यह भी मानना है कि आरसेप के मामले में भारत के लिए बनाए गए नियम बेहद कमजोर हैं। भारत की राय में आरसेप में नियमों को इस प्रकार बनाना चाहिए जिससे कि एक देश का माल दूसरे देश के जरिए किसी तीसरे देश में ना पहुंचे। चीन के संबंध में भी इसी तरह की आशंका जताई जा रही। साथ ही यह हमारे किसानों, एमएसएमई, डेयरी, विनिर्माण क्षेत्र, दवा, इस्पात और रासायनिक उद्योगों के लिए लाभदायक होगा।

