भारतीय विदेश मंत्रालय ने ईयू के सांसदों पर अपनी प्रतिक्रिया दी
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ईयू के सांसदों की कश्मीर यात्रा पर उठ रहे सवालों के जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की जानकारी में बात आने के बाद ही इस शिष्ठ मंडल को यात्रा की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा विशेष तौर पर यह दौरा भारत को बहुत करीब से जानने के लिए था।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि सभी सांसद यूरोप के विभिन्न देशों से आए हुए थे। भारत के बारे में उनके विचार अलग-अलग थे। यूरोप से आए हुए सभी सांसद अलग-अलग पार्टियों से थे। उन्होंने कहा कि सभी सांसद का भारत आना कोई पहली दफा की बात नहीं है इससे पहले भी वे भारत आ चुके हैं।
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विदेश प्रवक्ता रवीश कुमार ने नवजोत सिंह सिद्धू पर वार करते हुए कहा कि उन्हें पाकिस्तान के करतारपुर दौरे के लिए राजनीतिक तौर पर मंजूरी लेनी चाहिए थी।
आपको बता दें कि कश्मीर के जमीनी हालात का जायज़ा लेने आए यूरोपीय संघ के सांसदों ने पाकिस्तान के दुष्प्रचार पर अपनी प्रतिक्रिया दी। यूरोपीय संघ के सांसदों ने साफ कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना भारत का आंतरिक मामला है। हमारा भारत के अंदरूनी राजनीति से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कश्मीर को दूसरा सीरिया और अफगानिस्तान न बनने देने की बात कही। साथ ही उन्होंने गलत का आश्वासन देते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वह भारत का पूरा साथ देंगे। 31 अक्टूबर को केंद्र शासित प्रदेश बनने जा रहे जम्मू कश्मीर और लद्दाख के संदर्भ में एक दिन पहले यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों का यह बयान काफी मायने रखता है।
वहीं ईयू सांसदों के जम्मू-कश्मीर आने पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने करारा हमला बोला था। ओवैसी ने ट्वीट किया था कि घाटी जाने के लिए शानदार सांसदों का चुनाव किया गया है, जो इस्लामोफोबिया या नाज़ी लवर्स से पीड़ित हैं. मुस्लिम बहुल इलाके में इन्हें भेजा जा रहा।

