‘कोहिनूर’ हीरे का मालिक, ये दुनियां चलाएगा, लेकिन उसकी किस्मत फूट जायेगी -अज्ञात
दोस्तों, आज की दुनिया में ‘कोहिनूर’, हीरो यानि डायमंड का पर्याय बन चुका है| ये वो खज़ाना है, जो हर कोई लूटना चाहता है| न जाने इसके लिए कितने युद्ध हुए, कितनो ने अपनी जान गवाई और कितने ही लोग बेघर हुए| लेकिन आज भी ये बेशकीमती और नायब पत्थर अपने आप में एक रहस्य है| ताज़ा जानकारी के अनुसार कोहिनूर, ब्रिटेन की महारनी के ताज की शोभा बड़ा रहा है| बीच-बीच में कई दफा इसे भारत लाने की बात भी चलती है| लेकिन अंजाम वही ‘ढाक के तीन पात’|आइए जानते है इस अनमोल हीरे से जुडी कुछ रोचक जानकारियाँ|
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दुनियाभर में मशहूर ‘कोहिनूर’ वर्तमान आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित गोलकुंडा की खदान से प्राप्त हुआ था। इसी खान से दो और हीरे प्राप्त हुए| ‘दरया-ए-नूर’ और ‘नूर-उन-ऐन’ लेकिन जितनी प्रसिद्धि ‘कोहिनूर’ को मिली उतनी प्रसिद्धि दुनिया में आज तक किसी हीरे को नहीं मिली।जब ये खदान से प्राप्त हुआ, उस समय ये 793 कैरेट का था. अब यह 105.6 कैरेट का ही रह गया है जिसका वजन 21.6 ग्राम है. एक समय इसे दुनिया का सबसे बड़ा हीरा माना जाता था।
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इस हीरे के बारे में सबसे पहला जिक्र बाबरनामा में मिलता है कि ये 1294 के आस-पास यह ग्वालियर के किसी राजा के पास था। लेकिन इस हीरे को लोगो ने उस समय पहचाना जब 1306 में एक शख्स ने यह लिखा कि जो इंसान इसे पहनेगा वो ये संसार चलाएगा लेकिन इसके साथ ही उसका बुरा समय भी शुरू हो जाएगा।इसे बकिंघम पैलेस में महारानी विक्टोरिया के सामने पेश करने से पहले सबसे मशूहर डच फर्म ‘कोस्टर’ ने नया अंदाज दिया। इसका वजन तब 108.93 कैरेट रह गया| इसके बाद इसे रानी के ताज का हिस्सा बनाया गया। अब कोहिनूर का वजन 105.6 कैरेट है।
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