राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा की डिजाइन तैयार करने वाले इस व्यक्ति को क्यों नहीं दिया गया भारत रत्न
जब भी हमारे हृदय में हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा आता है तो हमारा हृदय खुशी से भर जाता है। तिरंगा पूरे विश्व में सबसे खूबसूरत राष्ट्रीय ध्वज है। मगर क्या आपको पता है कि इस झंडे की डिजाइन तैयार करने का श्रेय किस स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को दिया जाता है। एक ऐसा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जिसने अपनी पूरी जीवन गांधीवादी विचारधारा पर व्यतीत की। जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली उस समय भारत को एक ऐसे झंडे की आवश्यकता थी जो संपूर्ण अखंड भारत को एक सूत्र में जोड़ कर रख सके। ऐसे में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पिंगली वेंकैया ने यह जिम्मेदारी उठाई और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे में कुछ परिवर्तन कर हमें इस देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा दिया।
आखिर क्यों नहीं दिया गया भारत रत्न का पुरस्कार?
पिंगली वेंकैया का जन्म 1876 ईसवी में आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम शहर में हुआ था। उनके अंदर देशभक्ति का ऐसा जुनून था कि उन्होंने 19 साल की उम्र में ही ब्रिटिश फौज जॉइन कर ली। ब्रिटिश फौज की तरफ से लड़ने के लिए उन्हें दक्षिण अफ्रीका भेजा गया। जहां पर उनकी मुलाकात मोहनदास करमचंद गांधी से हुई और आने वाले 50 साल उन्होंने अपना जीवन इसी गांधीवादी विचारधारा पर बिताया। उन्हें हीरे के बारे में इतनी समझ थी कि लोग उन्हें डायमंड वैंकेया भी कहा करते थे। कपास की नई किस्म खोजने को लेकर उनके अंदर एक अलग ही जुनून था इसलिए लोग उन्हें कॉटन वैंकेया भी कहते थे। वर्ष 2011 में पिंगली वेंकैया को भारत रत्न पुरस्कार देने का प्रस्ताव रखा गया। मगर सरकार ने फिर भी पिंगली वेंकैया को भारत रत्न नहीं दिया।
आंध्र प्रदेश के हैदराबाद स्थित पिंगली वेंकैया चैरिटेबल ट्रस्ट ने 2011 में उन्हें भारत रत्न देने की मांग उठाई थी। मगर द हिंदू की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि सरकार ने सचिन तेंदुलकर को और एक वैज्ञानिक को भारत रत्न देने से पहले पिंगली वेंकैया के नाम पर विचार तक भी नहीं किया। एक महान शिक्षाविद होते हुए और भारत को इतनी बड़ी पहचान देने के बावजूद भी सरकारों द्वारा उनकी उपेक्षा बहुत ही शर्मनाक है।

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