अगर खुद को देशभक्त मानते है तो बताईये कि भारत का तिरंगा किसने बनाया था ?
यूँ तो हमारे भारत देश में देशभक्ति का नारा लगाने वाले लोगो की कमी नहीं है. मगर आज हम देश से संबंधित एक ऐसा सवाल पूछने वाले है, जिसका जवाब शायद ही किसी व्यक्ति को पता होगा. जी हां क्या आप जानते है कि भारत का तिरंगा किसने बनाया था. वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हम यहाँ उसी तिरंगे झंडे की बात कर रहे है, जो हर पंद्रह अगस्त को लहराया जाता है. जिसे भारत देश के लोग झुक कर या हाथ जोड़ कर सलाम करते है. बहरहाल भारत देश के तिरंगे झंडे का सम्मान तो सभी लोग करते है, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि भारत का तिरंगा किसने बनाया था. किस व्यक्ति ने इस तिरंगे को रंग दिए थे. यक़ीनन आप में से बहुत से लोग ऐसे होंगे जो इस सवाल का जवाब नहीं जानते होंगे.

बताईये कि भारत का तिरंगा किसने बनाया था..
अब जाहिर सी बात है कि हम में से बहुत से लोगो ने कभी इस सवाल का जवाब जानना तो दूर की बात, कभी इसके बारे में सोचा भी नहीं होगा. मगर यदि आप इस सवाल का जवाब जानना चाहते है, तो आपको इसका जवाब गूगल पर ढूंढने की कोई जरूरत नहीं है. जी हां वो इसलिए क्यूकि आज हम आपको यहाँ इस सवाल का जवाब जरूर देंगे. आज हम आपको बताएंगे कि वास्तव में भारत का तिरंगा किसने बनाया था. दरअसल हमारे भारत देश का तिरंगा पिंगली वेंकैया नाम के एक व्यक्ति ने बनाया था. हालांकि ये बात अलग है कि जब पिंगली जी ने यह तिरंगा बनाया था, तब लोगो ने उनकी कला को ज्यादा सराहा नहीं.
मगर जैसे जैसे उनके द्वारा बनाएं गए तिरंगे को सम्मान मिलता गया, वैसे वैसे उनके द्वारा निर्माणित किए गए तिरंगे की कदर भी बढ़ती चली गई. वैसे ये हमारे देश के लिए जरा भी अच्छी बात नहीं है कि जिस इंसान ने हमारे देश के तिरंगे का निर्माण किया, भारत देश के लोग उस व्यक्ति के बारे में कुछ जानते ही नहीं है. यही वजह है कि आज हम आपको उस व्यक्ति से रूबरू करवा रहे है, जिसने भारत का तिरंगा बनाया था. यहाँ तक कि जो लोग पिंगली साहब के बारे में नहीं जानते, वो उनकी तस्वीर यहाँ देख सकते है और उनके बारे में बहुत सी जानकारी हासिल कर सकते है.
बहरहाल अब तो आप जान ही गए होंगे कि हमारे भारत का तिरंगा किसने बनाया था.
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।

