हिंदुओं की अमरनाथ यात्रा इस बार फिर से है विवादों के घेरे में
हिंदुओं की पवित्र मानी जाने वाली अमरनाथ यात्रा हर वर्ष कश्मीरियों के सहयोग से संपन्न होती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर दर्शन के लिए जाते हैं। इस बार भी 1 जुलाई को यह यात्रा शुरू हो चुकी है। लाखों यात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। मगर पिछले कई दशकों से विवादों में रहने वाली यह यात्रा एक बार फिर से विवादों के घेरे में है। इस बार यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए की जाने वाली अनेक राज्यों में रोड बंदी और रेल बंदी से संबंधित है। इसके पहले भी यह यात्रा विवादों में रही थी। 1990 में आतंकी संगठन हरकत उल अंसार ने इस यात्रा को रोकने के लिए फतवा भी जारी किया था।
इस कारण विवादों में है यात्रा
अमरनाथ यात्रा और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। 1996 के बाद किसी भी आतंकी संगठन ने सार्वजनिक तौर पर इस पर प्रतिबंध लगाने का फतवा नहीं जारी किया। मगर कई बार आतंकवादियों ने श्रद्धालुओं को निशाना बनाया। पिछले दो दशकों में यात्रा पर जाने वाले लगभग 120 श्रद्धालुओं की हत्या की जा चुकी है। इसी कारण यात्रा के दौरान सुरक्षा बलों का चाक-चौबंद प्रबंध किया जाता है। जम्मू कश्मीर के अलगाववादियों को यह डर सताता है कि उनकी धर्म की दुकाने इस यात्रा के कारण बाधित हो सकती हैं। क्योंकि इस यात्रा में जम्मू कश्मीर के आम लोगों की सीधे हिस्सेदारी होती है।
2008 में भी हो चुका है विवाद
2000 यात्रा के दौरान भूमि आंदोलन के बहाने अमरनाथ समर्थक कश्मीरी दबंगई के खिलाफ उठ खड़े हुए थे। अलगाववादी इसके बहाने अपना एजेंडा चमकाने के प्रयास में लगे हुए थे। तत्कालीन पीडीपी के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से अपना समर्थन भी वापस ले लिया था। इस बार भी पीडीपी की प्रमुख और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस यात्रा को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



