बीजेपी प्रत्याशी का आरोप, बुर्के पहन कर किया जा रहा फर्जी मतदान
लोकसभा चुनाव के मतदान पड़ने शुरू हो गए हैं और प्रथम चरण के मतदान भी सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है और साथ ही कुछ जगहों से गड़बड़ी की खबरे भी सामने आई हैं। बात करें उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल का तो यहां पर प्रथम चरण में कुल आठ सीटों पर 63.69 प्रतिशत मतदान हुए जो कि पिछले लोकसभा चुनाव से 2 प्रतिशत कम वोटिंग को दर्शाता है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से फर्जी वोटिंग का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बीजेपी नेता ने बुर्कानशीं अर्थात् बुर्के पहन कर फर्जी वोट डालने का आरोप लगाया है। यह आरोप बीजेपी के केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरनगर से लोकसभा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान ने लगाया है।
बात दरअसल ये है कि जब लोकसभा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान पोलिंग बूथ पर पहुंचे तो उनको बुर्कानशीं महिलाओं पर फर्जी वोट डालने की आशंका हुई और उसी को लेकर उन्होने बवाल खड़ा कर दिया। उनका कहना है कि बुर्के में वोट डालने आ रही महिलाओं का चेहरा तो दिख नहीं रहा है कौन महिला कितनी बार वोट डाल रही है कुछ पता नहीं चल रहा है। इस तरह केन्द्रीय मंत्री ने यह आपत्ति बुर्के में वोट डालने आ रही महिलाओं के ऊपर उठाया और इस तरह फर्जी मतदान की आशंका दर्शायी। उन्होने कहा यदि इन महिलाओं की सही पहचान नहीं किया जा सकता तो चुनाव आयोग से यहां पुनः मतदान कराने की मांग करूंगा।
इस आपत्तिजनक दावे पर संज्ञान लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी व डीएम अजय शंकर पांडेय ने मामले की छानबीन करते हुए मतदान केंद्रों पर मतदान कर्मियों की संख्या बढ़ा दी ताकि बुर्कानशीं महिलाओं की सही ढंग से पहचान करके मतदान कराया जा सके। डी एम और एसएसपी ने बूथों का भलीभांति निरीक्षण किया। इस पर मुख्य चुनाव अधिकारी बीआर तिवारी ने इस आरोप को नकारते हुए कहा कि यदि कोई महिला घूंघट या बुर्के में है तो हमारे पास उनके लिए महिला मतदान कर्मी भी बूथों पर लगाए गए हैं, जो कि उनकी पहचान कर सत्यापित करती हैं तभी उनको मतदान की अनुमति प्राप्त होती है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ईवीएम में खराबी की वजह से मतदान देर से शुरू हुआ जिनमें सहारनपुर, बुलंदशहर, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के कुछ मतदान केन्द्रों के नाम सामने आए हैं। हालांकि जनता में इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अपनी सरकार को चुनने के क्रम में बहुत उत्साहित दिखाई दिए, वह प्रातः 7 बजे से ही पोलिंग बूथ के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो गए।
कई जगहों पर अत्यधिक गर्मी की वजह से लोग वोट डालने के लिए घर से बाहर नहीं निकले और कुछ किसान वर्ग अपने खेतों में काम करने में व्यस्तता की वजह से वोट डालने के लिए नहीं पहुंच सके।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



