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एससी/एसटी एक्ट में हुआ संशोधन

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में अपने ही फैसले को संशोधित कर दिया। पहले एससी/एसटी एक्ट में एफ आई आर के पहले जांच का प्रावधान था। लेकिन अब संशोधित फैसले के बाद गिरफ्तारी से पहले जांच की प्रक्रिया आवश्यक नहीं है। आदाब गिरफ्तारी की प्रक्रिया सीधे लागू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला केंद्र सरकार की पुनर्याचिका पर किया है। अब इस एक्ट के तहत एससी एसटी कर्मचारी और सामान्य नागरिक को गिरफ्तार करने से पहले अनुमति या फिर जांच की आवश्यकता नहीं होगी। परंतु इसके पहले शिकायत दर्ज करने के बाद एफ आई आर दर्ज करने के बाद ही कोर्ट ने जांच के आदेश दिए थे। साथ ही कुछ गाइडलाइंस का हवाला दिया था।

यह फैसला जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने यह फैसला सुनाया। आपको बता दें कि न्यायाधीशों द्वारा सुनाया गया पहले फैसला सीआरपी एक्ट में दिए गए प्रावधानों से इतर था। अर्थात् SC/ST समुदाय को विशेष सुविधा प्रदान की गई थी।

इसके बाद दलित संगठनों के विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने रिव्यू पिटिशन दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की पीठ ने मंगलवार को कहा कि समानता के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का संघर्ष देश में अभी खत्म नहीं हुआ है। जो कि उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। कोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी वर्ग के लोग अब भी छुआछूत, दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं और उन्हें बहिष्कृत जीवन गुजारना पड़ता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15 के तहत SC/ST वर्ग के लोगों को संरक्षण प्राप्त है, इसके बावजूद उनके साथ भेदभाव हो रहा है।

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इस कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग और झूठे मामले दायर करने के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि यह जाति व्यवस्था की वजह से नहीं  है बल्कि मानवताहीन भावना की  देन है। लोकतांत्रिक देश में इस तरह के भेदभाव का होना बेहद शर्मनाक है।

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