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पानी को सस्ते में शुद्घ करेगा नैनो पार्टिकल

चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति लाने के बाद अब नैनो पार्टिकल जल प्रदूषण को भी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग वैज्ञानिकों की टीम ने एक ऐसा रिसाइक्लेबल नैनो पार्टिकल ‘टिटेनियम फेराइट’ विकसित किया है, जिससे न सिर्फ किफायदी दर से पानी को साफ किया जा सकेगा, बल्कि उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण जल, नदी, नालों, पोखरों, तालाबों के जल को भी शोधित किया जा सकेगा। प्रो केएन उत्तम के मार्गदर्शन में हुए इस शोध को स्प्रिंगर पब्लिकेशन के जर्नल ऑफ मैटीरियल साइंस ने प्रकाशित किया है। खास बात यह है कि इस टेक्नोलॉजी के बाजार में आने के बाद पानी साफ करने की लागत कई गुना कम हो जाएगी।

हमारे पूर्वजों ने पानी शोधित करने के लिए धातु आधारित तकनीक विकसित कर रखी थी। कहा जाता है कि यदि तांबे के पात्र में रातभर पानी भरकर रख दो तो सुबह तक पानी के अंदर के सभी बैक्टीरिया मर जाते हैं। बढ़ते औद्योगीकरण और प्रदूषण के कारण अब यह तकनीक अप्रभावी हो चुकी है। बैक्टीरिया तो काफी हद तक मर जाते हैं पर पानी के अंदर टेक्सटाइल,चमड़ा व दवा जैसे उद्योगों से निकलने वाले कचरे को शोधित नहीं किया जा सकता। यदि औद्योगिक अपशिष्ट के कारण पानी का रंग नीला या काला पड़ गया हो तो उसे शोधित करने की अभी दुनिया में कोई भी तकनीक सर्वसुलभ नहीं है। यहां तक की पानी को 100 प्रतिशत शोधित करने का दावा करने वाले वाटर प्यूरीफायर भी औद्योगिक कचरे के कारण प्रदूषित पानी को शोधित करने की सस्ती सुलभ तकनीक नहीं विकसित कर पाए हैं। इस दिशा में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई यह तकनीकी कारगर उपाय साबित हो सकती है। शोध छात्र अभिषेक शुक्ला ने इसी विषय पर पीएचडी की है।

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