जानियें औरंगाबाद मे स्थित शिव मंदिर के बारे में, जो बना पहाड़ से
हमारे हिंदू धर्म में हम देखते है कि तमाम मंदिर के पीछे कोई ना कोई चीज अक्सर सुनने को मिलती है और देवी-देवताओं की महान माया भी है। लोग भी कहते है कि भगवान हर जगह मौजूद होते हैं लेकिन हमारे भारत की संस्कृति इस प्रकार है कि आप जहां भी जाएंगे हर जगह आपको देवी-देवताओं के अलग-अलग मंदिर देखने को मिलेंगे। तो आज हम एक ऐसै ही औरंगाबाद में स्थित मंदिर की बात करने जा रहे है जो किसी भी अजूबे से कम नहीं है।
मंदिर बनने मे लगे थे 18 साल
हम बताने जा रहे है एलोरा के कैलाश मंदिर की। जो स्थित है महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में। जहां इस मंदिर को बनने में सिर्फ 18 साल लगे थे लेकिन जिस तरह से इस मंदिर को बनाया गया है। उसे देखकर यह पता लगता है कि इस मंदिर को बनने में करीब 100-150 साल लगे होंगे।
खास बात
क्या आपको यह पता है कि यह मंदिर सिर्फ एक पहाड़ को काटकर और तराश कर बना है। जो स्थित है एलोरा की गुफाओं में। जो एक पहाड़ से बना हुआ है। कहते है कि 40 हजार टन वजनी पत्थर को काटकर इस मंदिर का निर्माण किया गया।
दर्शन के लिए देश-विदेश से आते है लोग
लोग यहां दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में यहां आते हैं लेकिन इस मंदिर की एक बात यह है कि इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं है। यहां आज तक कोई पूजा भी नहीं की गई। आपको बता दें कि इस मंदिर को सन् 1983 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया गया था।
मंदिर बनने में इतने मजदूरों ने दिया था योगदान
ऐसी जानकारी मिलती है कि इस मंदिर को बनाने वाले राजा का यह मानना था कि यदि कोई व्यक्ति हिमालय तक नहीं जा सकता तो वह यहां आकर अपने आराध्य भगवान शिव के दर्शन कर सकता है। दरअसल, इस मंदिर का निर्माण मालखेड़ में राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम (757-783 ईस्वी) द्वारा चालू हुआ था। जहां इस मंदिर के निर्माण कार्य के समय योगदान करने के लिए लगभग 7 हजार मजदूरों ने दिन-रात मिलाकर काम किया था।

