Breaking News Crime News 

दुष्कर्म विरोधी कानून पर्याप्त है?

देश में लगातार हो रही दुष्कर्म की घटनाओं ने सभी को मौन कर दिया है। क्योंकि अब यह मसला सिर्फ दुष्कर्म तक ही सीमित नहीं रह गया है। यह मसला दरिंदगी के बाद उन्हें जान से मारने तक पहुंच गया है। हैवानिगी की की सीमा असीमित सी हो गई है। ऐसा सिर्फ तभी संभव हो पा रहा है जब भी लोगों में कानून का भय खत्म हो गया है। ऐसे में क्या मौजूदा दुष्कर्म विरोधी कानून पर्याप्त है? क्योंकि हर ओर सवाल उठ रहे हैं कि दुष्कर्म विरोधी कानून के बावजूद भी महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध के बाद सारे सवाल अनुत्तरित से प्रतीत हो रहे हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ यही है कि क्यों नहीं रुक पा रही है महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न की घटनाएं।

निर्भया केस के बाद पूर्व चीफ जस्टिस जेएस वर्मा की कमेटी सिफारिशें क्या है? और बलात्कार कानून में संशोधन के बावजूद कार्यवाईयों में क्या कुछ बदलाव आया है? निश्चित तौर पर भय के साथ-साथ मानसिकता में बदलाव होना बेहद जरूरी है। भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 375 में बलात्कार के बारे में सेक्शन 376 में सजा का प्रावधान किया गया है।

जरूर देखें – तीन तलाक कानून से मुस्लिम महिलाओं को मिलेगी ताकत : दिया मिर्जा

इस सेक्शन में कहा गया है कि जब कोई पुरुष किसी महिला की इच्छा के बिना उसे डरा धमकाकर दिमागी रूप से उसे कमजोर करके, उसे बहला-फुसलाकर किसी नशीले पदार्थ का सेवन करा कर उसकी इच्छा के बिना के साथ संभोग करता है तो तो उसे बलात्कार करते हैं। इसमें चाहे किसी भी कारण से संभोग प्रक्रिया पूरी हुई हो अथवा नहीं कानून वह बलात्कार की श्रेणी में ही रखा जाएगा। अगर महिला की उम्र 18 वर्ष से कम है तो उसकी सहमति यह बिना सहमति से होने वाला संभोग भी बलात्कार की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे में कुछ प्रक्रिया में अपवाद भी है जैसे कोई चिकित्सा प्रक्रिया और चिकित्सा के वक्त हस्तक्षेप बलात्कार नहीं माना जाएगा। साथ ही किसी पति का उसकी पत्नी के साथ किया गया संभोग भी बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है। सिवाय उसकी पत्नी की आयु 15 वर्ष से कम ना हो।
इस कानून में मुख्य रूप से यह गाइडलाइन दी गई कि यदि पुरुष अपने प्राइवेट पार्ट को स्त्री के शरीर के किसी भी हिस्से से टच कराता है तो ऐसा कृत्य बलात्कार की श्रेणी में रखा जाएगा।

Related posts

Leave a Comment