चंद्रमा के बाद इसरो अब हो जाएगा समुद्र के गहरे राज
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था यानी इसरो दिन प्रतिदिन अब नई ऊंचाइयों को छूता जा रहा है। इसरो की स्थापना 15 अगस्त 1969 को डॉ विक्रम साराभाई के प्रयासों के द्वारा हुई थी। एक समय ऐसा था जब भारत को अपने पहले मिसाइल के परीक्षण के लिए मिसाइल को साइकिल पर लादकर ले जाना पड़ा था। परंतु आज समय बदल गया है। आज इसरो अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा से प्रतिस्पर्धा कर रही है।
हाल ही में चंद्रमा पर अपना मिशन भेजे जाने के बाद अब इसरो ने समुद्र के गहरे राज पता करने के लिए एक ऐसी पनडुब्बी का डिजाइन तैयार कर लिया है जो समुद्र के असीमित दबाव को सहन करने में सक्षम होगी। इसरो वैज्ञानिक ने बताया कि इस तरह की पनडुब्बी का डिजाइन तैयार कर लिया गया है। अब इसे एक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को भेजा जाएगा और उसकी पुष्टि होते ही इसके निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
इसरो बताएगा विश्व को समुद्र के गहरे राज

दरअसल भारतीय तकनीकी संस्थान के सिल्वर जुबली कार्यक्रम में शामिल हुए इसरो के भू विज्ञान विभाग के सचिव माधवन ने बताया कि 10000 करोड रुपए की लागत से बनने वाली इस गोलाकार पनडुब्बी का डिजाइन तैयार कर लिया गया है। इसमें भारतीय तकनीकी संस्थान इसरो की मदद करेगा। भारतीय तकनीकी संस्थान को गोलाकार कैप्सूल में इलेक्ट्रॉनिक्स और नेविगेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से प्रमाणित होने के बाद इस डिजाइन के निर्माण कार्य को इसरो जल्दी से जल्दी पूरा करने का प्रयास करेगा।
कैसे होगी आम पनडुब्बियों से अलग
यह गोलाकार कैप्सूल पनडुब्बी के रूप में समुद्र के अंदर 6000 मीटर तक जाकर समुद्र के गहरे राज पता कर पाएगा। इसमें तीन व्यक्तियों के बैठने की जगह भी होगी। जो आम पनडुब्बियों होती वह केवल समुद्र के अंदर 200 मीटर की गहराई तक ही जा पाती हैं।
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