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गगन मिशन के लिए इसरो और डीआरडीओ ने एमओयू पर किए हस्ताक्षर

इसरो( भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान) और डीआरडीओ ( रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने गगन मिशन योजना के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। भारत ने अंतरिक्ष में एक के बाद एक तमाम बुलंदियां हासिल की हैं।

चाहे वह मंगलयान हो या या फिर चन्द्रयान-2 की लॉन्चिंग, भारत ने विश्व भर में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है।इससे लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं और उनकी विचारशक्ति यह सोचने लगी है कि वह समय कब आएगा जब भारत अपने स्पेस क्राफ्ट के जरिए लोगों को स्पेस में भेजेगा।

इसरो डीआरडीओ की कोशिश की यह कोशिश होगी कि गगन  मिशन के तहत वह स्पेस क्राफ्ट में मानव की सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्था करें। इसे विशेष तौर पर 2 से 3 लोगों को स्पेस में ले जाने के लिए विकसित किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बताया, डीआरडीओ की तरफ से इसरो को कुछ महत्वपूर्ण तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें अंतरिक्ष में भोजन संबंधी तकनीक, अंतरिक्ष जाने वाले दल की सेहत पर निगरानी, सर्वाइवल किट, विकिरण मापन और संरक्षण तथा पैराशूट आदि शामिल हैं। यह भारत का पहला ऐसा मिशन होगा जिसमें स्पेस क्राफ्ट के साथ साथ एस्ट्रोनॉट्स को भी भेजा जाएगा।

डीआरडीओ के अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि रक्षा एप्लीकेशन के लिए डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं की मौजूदा तकनीकी क्षमताओं को इसरो के मानव अंतरिक्ष मिशन की जरूरतों के सुविधा अनुसार बनाया जाएगा।

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इसरो ने 2022 में भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने से पहले इसे जश्न के रूप में मानव के अंतरिक्ष में पहुंचने की क्षमता को विश्व में प्रदर्शित करने की योजना बनाई है। अब देखना यह है कि अन्य सफलताओं की तरह भारत इस इस मिशन में अपने झंडे कितनी ऊंचाई तक गाड़ पता है।

भारत के वैज्ञानिकों की सकारात्मक विचारधारा अवश्य ही हमें इस मिशन में सफलता दिलाएगी।अतः हमें भी सकारात्मकता के साथ उस सफलता का इंतजार करना है।

 

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