अयोध्या विवाद केस में सुनवाई की आखिरी तारीख हुई फाइनल स्वयं चीफ जस्टिस की जानिब से
सुप्रीम कोर्ट में की अयोध्या विवाद केस में ज़ारी सुनवाई के दौरान चीफ जसिटस रंजन गोगोई ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि मामले में सारी जिराह 18 अक्टूबर तक पूरी हो जानी चाहिए। CJI गोगोई ने यह भी कहा कि सभी दलों के पास इस काम को पूरा करने के लिए साढ़े 10 दिन का समय बचा हैं।
CJI रंजन गोगोई जिनका कार्यकाल 17 नवंबर में समाप्त हो रहा है, ने कहा कि अगर फैसला चार सप्ताह में सुनाया जाता है, तो अदालत “एक चमत्कार हासिल करेगी”।18 अक्टूबर की समयसीमा पर जोर देते हुए, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि एक सप्ताह की दिवाली की छुट्टी को ध्यान में रखते हुए बहस पूरी की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने पिछले हफ्ते राम-जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के 70 सालो से भी अधिक लंबे मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए शनिवार को भी ओवरटाइम काम करने की पेशकश की थी।
मामले की सुनवाई करने वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं ऐसे में सुनवाई की आखिरी तारीख का आ जाना इस केस में अहम मोड़। दरअसल समय से सुनवाई पूरी हो जाने के बाद बात-बात पर केस तारीख आगे बढ़ाने में जुटा मुस्लिम पक्ष इस बात को अच्छे से समझता है कि अब न ही उसके पास कोई तर्क है न सबूत जिससे वह केस की सुनवाई को टाल सके।
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स्वयं चीफ जस्टिस भी इस बात को जानते है कि कभी राम चबूतरे को श्रीराम जन्मस्थान मानने और फिर इंकार करने वाला मुस्लिम पक्ष वास्तव में चाहता क्या है , उसे पता है कि अब उसकी दाल नहीं गलने वाली तभी तो चीफ जस्टिस की जानिब से ही इस सबसे बड़े धार्मिक जमीनी केस की सुनवाई की आखिरी तारीख 17 अक्टूबर तय की गई है।
18 अक्टूबर की समय सीमा निर्धारित करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की बात को भी खुला रखा और कहा कि हितधारक मध्यस्थता के माध्यम से एक सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के लिए स्वतंत्र हैं, यदि वे ऐसा चाहते हैं, और अदालत के समक्ष समझौता करने को इच्छुक हो तो।
संविधान पीठ, जिसमें जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नाज़ेर भी शामिल है , ने अब तक 32 दिनों तक अयोध्या भूमि विवाद मामले की सुनवाई की है जिसमें मध्यस्थता की विफलता के बाद 6 अगस्त को दिन-प्रतिदिन की सुनवाई शुरू हुई।
सौहार्दपूर्ण समाधान ही सुप्रीम कोर्ट का अंतिम लक्ष्य क्योंकि स्वयं रामराज्य में किसी दूसरे पक्ष के साथ अन्याय नहीं होता था लेकिन इसका मतलब कदापि यह नहीं कि सहिष्णु हिन्दुओं को उनके इष्ट मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्भूमि पर अधिकार से वंचित किया जाए। अब सुनवाई की तारीख आ चुकी है तो फैसला भी इसी साल आएगा यही आशा करनी चाहिए।
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Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

