जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयकNews politics 

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून को मंजूरी प्रदान कर दी है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को शुक्रवार 9 अगस्त को मंजूरी प्रदान की।

विधेयक का परिणाम-

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के कानून बनने के उपरांत जम्मू कश्मीर राज्य 31 अक्टूबर 2019 से जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश एवं लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के रूप में स्थापित हो जाएगा।

बीते एक पखवाड़े से जम्मू-कश्मीर में सेना एवं अर्धसैनिक बलों की बढ़ती मौजूदगी से सारे देश एवं अंतरराष्ट्रीय जगत में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई थी। जिसे गृह मंत्री अमित शाह ने, सोमवार 5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक को पेश करते हुए, जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में स्पष्ट किया। दोनों सदनों में जोरदार बहस के बाद सरकार ने इसे दो तिहाई बहुमत से पारित करवाकर, जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जा अनुच्छेद 370 एवं 35a को समाप्त कर दिया। जिसे आज राष्ट्रपति ने मंजूरी प्रदान कर दी।

मौजूदा हालात-

सोमवार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को सदन में पेश करने के साथ ही जम्मू कश्मीर में धारा 144 लागू कर दी गई थी। वहीं आज जम्मू से धारा 144 को हटा दिया गया है, जबकि कश्मीर में अभी भी धारा 144 लागू है। कल से जम्मू में स्कूल, कॉलेज खुलेंगे और विश्वविद्यालयो की परीक्षाएं नियमित रूप से होंगी।

धारा 144 लागू होने के बाद कल पहली जुमे की नमाज थी, जिसमें आम नागरिक घरों से बाहर निकले एवं सड़कों पर चहल-पहल भी दिखी। जनजीवन धीरे धीरे सामान्य हो रहा है। पूरे घाटी से कहीं भी किसी प्रकार की घटना अभी तक सामने नहीं आई है, हालांकि विशेष चेतावनी बरतते हुए सेना एवं पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है

इस विधेयक की मंजूरी के बाद जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया है। राज्य के समस्त विशेषाधिकार समाप्त हो जाएंगे। यहां अन्य राज्यों की तरह समस्त विधायी, कार्यपालकीय एवं न्यायिक कार्य किए जा सकेंगे। भारत सरकार के समस्त कानून लागू होंगे।

जैसा कि हम सब जानते हैं कि इस कानून से पहले प्रदेश के भीतर राज्य के नागरिकों के अलावा किसी अन्य नागरिक को किसी भी प्रकार का अधिकार प्राप्त नहीं था। साथ ही आजादी के बाद विस्थापित होने वाले समुदाय को भी कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। इस कानून के बाद सभी विस्थापित नागरिकों को कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे, साथ ही देश के अन्य नागरिकों को भी यहां रहने, बसने, व्यापार करने की स्वतंत्रता प्राप्त हो जाएगी। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत के मुकुट के नाम से विख्यात इस राज्य में आतंकवाद अलगाववाद खत्म होगा एवं राज्य में पर्यटन, शिक्षा, उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। ‘धरती के स्वर्ग’ उप नाम से विख्यात इस राज्य को फिर से ‘धरती का स्वर्ग’ बनाया जा सकेगा।

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