लोकसभा ट्रिपल तलाक बिल बहस में इन दोनों नेताओं के बीच हुई तीखी तकरार
ट्रिपल तलाक बिल बहस : शुक्रवार को लोकसभा में सरकार में अपना तीन तलाक बिल पेश किया| विपक्ष के भारी हंगामे के बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में बिल को पेश करते हुए कहा कि यह महिला न्याय , महिला इंसाफ वाला बिल है|
कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों ने इसको असंवैधानिक बताते हुए भेदभाव करने वाला बिल करार दिया| मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2019 एक ही बार में तीन बार तलाक कहने वालीइस्लामी कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए है| नए बिल के ध्वनि मत से चर्चा के लिए स्वीकार किए जाने पर विपक्ष की आपत्ति के बाद इसे पेश किए जाने को लेकर हुई वोटिंग में 186 वोट समर्थन में तो 74 वोट विरोध में पड़े|
सरकार की तरफ से कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारतीय संविधान में आर्टिकल 15 लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होने की बात कहता है इसलिए यह बिल सियासत. इबादत ,धर्म या मजहब से ऊपर नारी के साथ न्याय और उसकी गरिमा को महफूज रखने के लिए है|
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ट्रिपल तलाक बिल बहस : सत्ता पक्ष और विपक्ष का तर्क
बिल के विरोध में बोलते हुए सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक बिल को संविधान के आर्टिकल 14 &15 का उल्लंघन बताकर इसका विरोध किया| ओवैसी ने बिल को मुसलमानों के साथ भेदभाव करने वाला बताया| उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि एक बार में तीन तलाक कह देने से शादी ख़त्म नहीं हो सकती|
उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी नॉन मुस्लिम पति पर केस हो तो उसे 1 साल की सजा लेकिन मुस्लिम पति को 3 साल , यह साफ तौर पर भेदभाव है| यह संविधान विरोधी है और यह महिलाओं के हितों के खिलाफ है| ओवैसी ने सवाल किया कि अगर पति जेल में रहा तो महिलाओं को मेंटेनेंस कौन देगा? क्या सरकार देगी ? भारी हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिड़ला को सांसदों को कई बार रोकना पड़ा|
पिछले साल दिसंबर में तीन तलाक विधेयक को लोकसभा ने मंजूरी दे दी थी लेकिन राज्यसभा में पारित नहीं हो पाया था| अब अगर यह विधेयक इस बार संसद के दोनों सदनों में पास हो गया तो यह मौजूदा अध्यादेश की जगह ले लेगा|
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Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

