अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारतीय मुद्रा को निगरानी सूची से किया बाहर
भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ता जा रहा है। पिछले 5 सालों में भारत ने विश्व में अपनी पहचान एक अलग रूप में ही स्थापित की है। विश्व के विकसित देश अब भारत में भरोसा जताने लगे हैं। विदेशी कंपनियां भारत में पूंजी लगाने को भी तैयार हो गई हैं। भारत अब विश्व की एक नई बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। विश्व के सभी देशों का ध्यान भारत की तरफ धीरे-धीरे खींचा चला आ रहा है। हाल ही में इसका एक और उदाहरण देखने को मिला। अमेरिका और भारत के संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी अच्छे हो गए हैं। एक बार फिर से अमेरिका ने भारत पर भरोसा जताया है। इसकी ताजा मिसाल पेश करते हुए अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारतीय मुद्रा को निगरानी सूची से बाहर कर दिया है जबकि चीन की मुद्रा अभी भी अमेरिका की निगरानी सूची में है।
भारतीय मुद्रा हुयी अमेरिका की निगरानी सूची से बाहर
दरअसल अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अक्टूबर 2018 में भारत के साथ साथ चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और स्विट्जरलैंड की मुद्राओं को निगरानी सूची में डाला था। अमेरिका कुल देशों की मुद्राओं को अपनी निगरानी सूची में डालता है जिन देशों की विदेशी विनिमय पर उसे संदेह होता है। चीन अभी भी अमेरिका की निगरानी सूची में बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका ने चीन को चेतावनी दी है कि वह अपने विदेशी विनिमय को सुधारने के लिए कठोर कदम उठाए। यूएस कांग्रेस के सामने पेश की गई सूची में भारत और स्विट्जरलैंड को निगरानी सूची से बाहर कर दिया गया है। अमेरिका ने भारत पर एक बार फिर से विश्वास जताया है।
इसके अलावा अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया है कि चीन लगातार कमजोर होती जा रही अपनी मुद्रा को मजबूत करने का कोई भी प्रयास नहीं कर रहा है। दरअसल चीन की मुद्रा पिछले एक साल में ही अमेरिका के डॉलर के मुकाबले 8% नीचे गिर गई।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



