माता सीता का श्राप आज भी भुगत रहे है ये चार लोग
यूँ तो भारत देश के लोग रामायण की हर गाथा के बारे में अच्छी तरह से जानते होंगे। मगर आज हम आपको रामायण से संबंधित उस किस्से के बारे में बताने जा रहे है, जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे। जी हां आज हम आपको बताएंगे कि कैसे माता सीता का श्राप आज तक ये चार लोग भुगत रहे है। दरअसल जब राम, सीता और लक्ष्मण जी वनवास के लिए गए थे, तब उनके जाने के बाद उनके पिता यानि राजा दशरथ जी की मृत्यु हो गई थी। बता दे कि राजा दशरथ अपने पुत्रो से अलग होने का दुःख सहन नहीं कर सके और उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। वही जब राम और लक्ष्मण जी को उनकी मृत्यु की सूचना मिली, तब वह पिंडदान की व्यवस्था करने के लिए वन में से जरुरी सामान लेने के लिए चले गए।

माता सीता का श्राप..
हालांकि इस दौरान राम और लक्ष्मण जी को काफी देर हो गई। जिसके कारण सीता जी काफी चिंतित हो गई थी। बता दे कि स्थिति को देखते हुए सीता जी ने खुद ही उनका पिंडदान कर दिया। वही दूसरी तरफ जब राम और लक्ष्मण जी वापिस आएं तो सीता जी ने उनसे कहा कि आपको काफी देर हो गई थी। जिसके कारण उन्होंने दशरथ जी का पिंडदान कर दिया। इसके साथ ही माता सीता ने पिंडदान के साक्षी पंडित, गाय, कौवा और पास में बहने वाली फल्गु नदी को बताया। हालांकि जब राम जी ने इन सबसे पिंडदान की पुष्टि के बारे में पूछा तो इन्होने इंकार कर दिया। बता दे कि इन चारो की झूठी गवाही से न केवल राम जी बल्कि सीता जी भी काफी क्रोधित हुई। मगर सीता जी ने अपनी सच्चाई साबित करने के लिए राम जी के सामने राजा दशरथ की आत्मा का आवाहन किया।
जिसके बाद राजा दशरथ की आत्मा स्वयं वहां प्रकट हुई और फिर दशरथ जी ने राम जी के सामने खुद ये बताया कि सीता जी ने उनका पिंडदान कर दिया है। इसके बाद माता सीता का श्राप उन चार लोगो को मिला जिन्होंने राम जी के सामने झूठ बोला था। जी हां सीता जी ने पंडित से कहा कि तुम कितना भी मांग लो, लेकिन तुम्हारी गरीबी कम न होगी। इसके बाद उन्होंने फल्गु नदी को श्राप दिया कि यह नदी सूख जाएगी और कौवे से कहा कि तुम कभी अपना पेट नहीं भर पाओगे। इसके साथ ही उन्होंने गाय से कहा कि लोग तुम्हारी पूजा तो करेंगे, लेकिन तुम्हे हमेशा झूठा ही खाना पडेगा।
बता दे कि माता सीता द्वारा दिया गया श्राप ये चार प्राणी आज तक भुगत रहे है।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



