केंद्रीय मंत्रियों की शिकायत का ब्यौराBreaking News Crime Humor News Opinion Security 

केंद्रीय मंत्रियों की शिकायत का ब्यौरा साझा करने से प्रधानमंत्री कार्यालय ने किया इनकार ।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों का विवरण साझा करने से इनकार किया है । केंद्रीय मंत्रियों की शिकायत पर पीएमओ का कहना है कि इस तरह की शिकायतें और सूचनाएं साझा करना आसान नहीं है । पीएमओ का यह बयान ऐसे समय में आया कि जब देश की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई ) के वरिष्ठ अधिकारी ने केंद्रीय कोयला एवं खनन राज्यमंत्री हरीभाई पारथीभाई चौधरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं ।

केंद्रीय मंत्रियों की शिकायत का ब्यौरा साझा करने से प्रधानमंत्री कार्यालय ने किया इनकार

आरटीआई दाखिल करने के द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में पीएमओ के द्वारा कहा गया कि पीएमओ को विभिन्न मंत्रियों के एवं उच्चस्तरीय पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें समय-समय पर प्राप्त होती रहती हैं । पीएमओ ने विसलब्लोअर नौकरशाह संजीव चतुर्वेदी द्वारा दाखिल आरटीआई के सवाल के जवाब में कहा कि इनमें बेनाम से मिली भ्रष्टाचार की शिकायतें भी शामिल है । केंद्रीय मंत्रियों की शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता को देखते हुए और भ्रष्टाचार आरोप संबंधी दस्तावेजों की उचित जांच की जाती है ।

भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स ) में मुख्य सतर्कता अधिकारी रहते हुए भ्रष्टाचार के कई मामलों को लोगों के सामने लाया था । आरटीआई आवेदन के जवाब में पीएमओ ने कहा कि जरूरी कार्रवाई करने के बाद रेकार्डों को एक जगह नहीं रखा जा सकता है । वह इस कार्यालय की विभिन्न इकाइयों एवं क्षेत्रों में फैले हुए रहते हैं । पीएमओ ने कहा कि प्राप्त केंद्रीय मंत्रियों की शिकायत, भ्रष्टाचार और गैर – भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों समेत कई और संदिग्ध भ्रष्टाचार मामलों से जुड़ी रहती हैं । आवेदन कर्ता ने अपने आवेदन में केवल भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों का ब्यौरा मांगा है ।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इन सभी भ्रष्टाचार से जुड़ी केंद्रीय मंत्रियों की शिकायत को पहचानना , जांचना और अलग अलग श्रेणी में रखना जटिल काम हो सकता है । मानी गई सूचनाओं के मिलान के लिए कई विशेष फाइलों की गंभीरता से जांच करनी होगी । जांच के फलस्वरूप तब पता लगाया जा सकता है कि कौन सी शिकायतों का विवरण साझा करने योग्य हो सकता है । बिना जांच किए सारी शिकायतों का विवरण साझा करना आसान नहीं हो सकता । यह शिकायतें कई प्रकार के मामलों से जुड़ी हुई हैं । इसके फलस्वरूप जांच के माध्यम से ही शिकायतों को अलग-अलग श्रेणी में रख सकते हैं । इसके बाद ही शिकायतों को साझा किया जा सकता है ।

 

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