पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने से सरकार आई मुसीबत में
हाल ही में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती करने की घोषणा की है । जिसमें केंद्र सरकार ने ढाई रुपए प्रति लीटर पेट्रोल में कमी करने की घोषणा की है । साथ ही साथ राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह भी 2.5 रुपये प्रति पेट्रोल में कमी करें ।
पेट्रोल डीजल के दाम कम करने से सरकारी खजाने से लगभग 6500 करो रुपए का नुकसान होने का उम्मीद है । अगर सरकार टैक्स या फिर अंसा अन्य साधनों से राजस्व बढ़ाने की कोशिश करती है तो उसकी पूर्ति की जा सकती है
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में 3.3% वित्तीय घाटे के साथ लक्ष्य पूरा करने का प्रयास किया जाएगा । पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती करने के फैसले को लेकर रेटिंग एजेंसियों और विश्लेषकों ने यह प्रतिक्रिया दी थी कि राजस्व को बहुत कम नुकसान होने से वित्तीय घाटा के बढ़ने की उम्मीद नहीं है ।
पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने से जहां पर भारतीय नागरिकों को थोड़ी सी महंगाई में राहत मिली है । वहीं यह राहत केंद्र सरकार की मुश्किलों को और बढ़ा दी है । गौरतलब के सन 2014 के बाद से तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत में जबरदस्त का सुधार हुआ था क्योंकि मोदी सरकार ने कीमत तय करने पर लगे सरकारी नियंत्रण को खत्म कर दिया था और उसके पश्चात निर्णय लेने का अधिकार तेल कंपनियों को बाजार के मुताबिक तय करने का अधिकार दिया था ।
इस तरह से पेट्रोल और डीजल पर मिलने वाली सब्सिडी धीरे-धीरे घटती गई और तेल कंपनियों की बैलेंस शीटों में सुधार देखने को मिलता गया । इसका प्रमुख कारण ये था कि तेल कंपनियों पर जो कर्ज था वह धीरे-धीरे उसकी भरपाई होती रही और उनका मुनाफा बढ़ता चला गया ।
पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने से सरकार को वित्तीय घाटे का भी सामना करना पड़ सकता है । सरकार जहां उम्मीद करती है कि वह अपने लक्ष्य पर खरा उतर सकेगी लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि जीएसटी से जो भी राजस्व जुटाया जा रहा है । उससे अच्छी खासी वृद्धि की उम्मीद नहीं दिख रही है ।

