पाकिस्तान के लिए बस अब एक ही उम्मीद आईएमएफ
हाल ही में पाकिस्तान में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव हुआ । जिसमें इमरान खान विजयी हुए और पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बनने के पश्चात उनके सामने सबसे पहली और सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सुधारा जाए । पाकिस्तान कंगाली की तरफ बढ़ रहा है । पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से ध्वस्त हो चुकी है । ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री को अर्थव्यवस्था को फिर से स्थापित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी । इसके लिए अब उनके पास केवल एक ही उम्मीद है । पाकिस्तान के लिए उम्मीद की अंतिम किरण आईएमएफ है ।
हालातों पर समीक्षा करने के पश्चात रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तान पिछले चार दशकों से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है । वर्तमान समय में पाकिस्तान के पास केवल 2 महीने की ही संपूर्ण राशि बची हुई है । ऐसे में अगर आर्थिक स्थिति और अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो पाकिस्तान में आपातकाल स्थिति की घोषणा की संभावना प्रबल हो जाएगी ।
गौरतलब है कि ऐसी स्थितियों में विकट चुनौतियों के बीच आईएमएफ का एक संगठित समूह पाकिस्तान पहुंचकर अगले चार दिनों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एवं हालातों का जायजा लेगा और संबंधित विस्तृत रिपोर्ट को आईएमएफ को सौंपेगा । जिससे यह अनुमान लगाया जाएगा कि पाकिस्तान के हालात क्या है और आईएमएफ मदद करने का निर्णय किस प्रकार से ले ।
ज्ञातव्य है कि पिछले 3 दशकों में पाकिस्तान में ऐसे हालात बहुत बार आए जिसमें पाकिस्तान को आईएमएफ से मदद लेनी पड़ा और आईएमएफ ने भी हाथ बढ़ा कर मदद किया परंतु इस बार स्थिति पहले से ज्यादा विकट है । ऐसी स्थिति में आईएमएफ पाकिस्तान की मदद करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहा है । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनेक प्रकार के प्रतिबंध भी लगाए हैं जिसकी वजह से आईएमएफ अब एक अपनी निश्चित सीमा के अंतर्गत ही कार्य करना चाहेगा ।
पाकिस्तान अगर आतंकवाद और आतंकवादियों के खिलाफ़ अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करता तो पाकिस्तान में संकट और भी ज्यादा गहरा सकते हैं । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकवादियों का स्वर्ग कह कर बताया कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ाने वाला देश है और इसे ग्रे लिस्ट में रखा जाए । इस वजह से पाकिस्तान को अन्य देशों से मिलने वाली आर्थिक मदद भी काफी प्रभावित हुई है ।

