राहुल के आरोपों को फ्रांस ने खारिज किया!
लोकसभा में शुक्रवार के दिन अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई । जिसकी वजह से सदन में काफी गर्मागर्मी का माहौल रहा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अपने भाषण के दौरान केंद्र सरकार व मोदी पर बड़े-बड़े आरोप लगाए । इसके साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी आरोप लगाये। उन्होंने कहा कि राफेल डील में किसी भी प्रकार की सच्चाई नहीं है इसमें घोटाले हो रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि जब यह डील कांग्रेस के सरकार के समय हुई तो एक प्लैन की कीमत 520 करोड़ रुपए रखी गई थी और अब मोदी सरकार के समय राफेल डील में प्लेन की कीमत ₹1600 करोड़ रखी गई है । यह जनता की मेहनत के पैसे की पूरी तरह से बर्बादी है । क्या मोदी सरकार बता सकती है कि राफेल डील की असल मे बजट क्या है।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा था कि 25 जनवरी 2008 फ्रांस सरकार और भारत सरकार के बीच में हुई थी । यह डील कांग्रेस के समय में हुई। हम केवल उसे आगे बढ़ा रहे हैं हमने इसमें कोई भी परिवर्तन नहीं किया है ।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह एक सीक्रेसी एग्रीमेंट है जो कि दो सरकारों के बीच में हुआ है । इसकी गोपनीयता बरकरार रखने पर भी करार हुआ है । अतः हम सदन में राफेल डील से संबंधित तथ्यों को पेश नहीं कर सकते।
राहुल गांधी की बात का जवाब देने के लिए फ्रांस सरकार भी सामने आई है । उन्होंने कहा सिक्योरिटी एग्रीमेंट के अनुसार हम दोनों देश इसकी गुप्त सूचना को किसी भी प्रकार से सार्वजनिक नहीं कर सकते क्योंकि इसका प्रभाव सीधे-सीधे इसके क्रियान्वयन पर पड़ेगा ।
फ्रांस की सरकार ने अपने बयान में कहा कि 9 मार्च 2018 मैं फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक टीवी के इंटरव्यू के दौरान साफ शब्दों में कहा था कि हम दोनों देशो ने इसको लेकर गोपनीयता के मूल्यों पर भी हस्ताक्षर किए हैं ।
इसके पहले राहुल गांधी ने निर्मला सीतारमण पर यह आरोप लगाते हुए कहा था कि वह नरेंद्र मोदी के दबाव में आकर राफेल डील में हुई गड़बड़ी के बारे में देश को बताना नहीं चाहती हैं । प्रधानमंत्री के फ्रांस जाने पर ना जाने फ्रांस सरकार और प्रधानमंत्री में राफेल डील पर क्या बात हुई की प्लेन की कीमत 520 करोड़ रुपए से बढ़ कर सोलह सौ करोड़ रुपए हो गई ।

