News 

राज्यसभा में उपसभापति के समक्ष मायावती का इस्तीफा एक हाई वोल्टेज ड्रामा केवल राजनीति के मैदान मे गिरती लोकप्रियता और शाख को बचाने का आखरी प्रयास

खिसयानी बिल्ली खम्बा नौचे वाली कहावत का बसपा प्रमुख मायावती से बड़ा ही गहरा सम्बंध है ,2012 चुनाव से मिल रही निरंतर असफलताओ के बाद मायावती की तिलमिलाहट  तब और भी बढ़ गई जब 2017 के विधान सभा चुनाव मे उनके पारम्परिक दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक ने लोकतंत्र की चौखट पर उन्हें कदम रखने के लायक भी नही छोड़ा और परिणाम स्वरूप उन्हें केवल 19 सीटे ही मिल सकी जो कि राज्यसभा मे बने रहने के लिए नाकाफी थी।

अपनी इसी अयोग्यता को ध्यान मे रखते हुए मायावती ने दलित और अल्पसंख्यको के हितो का हवाला देते हुए राज्य सभा उपसभापति के समक्ष अपनी बात रखी, लेकिन निर्धारित समय मे बात खत्म न करने पर जब मायावती को उपसभापति द्वारा टोका गया तो मायावती ने अपना आपा खो दिया और इस्तीफा देने के धमकी के साथ सदन छोड़कर चली गई ।

मायावती का ये हाई वोल्टेज  ड्रामा अपनी राजनीति के मैदान मे गिरती लोकप्रियता और अपने पारम्परिक वोट बैंक को सम्भालने की कोशिश के सिवा कुछ नही हो सकता । साथ ही मायावती को ये आभास भी हो चला था कि आज राज्यसभा मे बहुमत मिलना वर्तमान परिस्तिथियों मे असम्भव है इसलिए आज अपने पारम्परिक वोट बैंक के हितो का हवाला देते हुए एक बार फिर फर्श से अर्श तक का सफर तय करने का सुंदर और काल्पनिक स्वप्न देख रही है ।

सुन्दर और काल्पनिक स्वप्न इसलिए क्योकि अब उनका पारम्परिक वोट बैंक कहा जाने वाला दलित और अल्पसंख्यक वर्ग हंस की तरह दूध में मिले पानी की मिलावट से भलीभाँति  परिचित हो चला है उसे मायावती के राजनीतिक दूध में मिलावट का पानी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसका स्पष्टीकरण भी वो अपने मत के माध्यम से 2017 के विधानसभा चुनाव में कर चुका है !

इसलिए मायावती को भी अब ये स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि गरीब ,शोषित ,मजदूर, दलित जैसे शब्दों व उनके झूठे उत्थान के वादो के माध्यम से राजनीति के मैदान मे पैर जमा पाना अब सम्भव नही है ।

अच्छा होगा कि मायावती किसी वर्ग विशेष और जाति विशेष की नफरत और दुर्भावना पूर्ण राजनीति से त्याग पत्र देकर राष्ट्र उत्थान और विकास के मुद्दों के साथ राजनीतिक मैदान मे कदम रखे ।

17eab247-d1f1-4df6-89d3-2123e29a7b57

Related posts

Leave a Comment