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मोदी सरकार पर 2.4 लाख करोड़ के कर्ज माफ करने के आरोपों का सच।

राहुल गाँधी ओर कांग्रेस पार्टी तथा उनसे जुड़ा तथाकथित बुद्धिजीवी पत्रकार वर्ग विभिन्न माध्यमों से ये प्रचार कर रहा है कि मोदी सरकार ने उद्योगपतियों के करीब ढाई लाख करोड़ का कर्ज माफ कर दिया है।

इसके आरोप के पक्ष में उन्होंने विभिन्न आंकड़े, दावे ओर कुछ रिपोर्ट प्रस्तुत किये है। तो आम जनता के मन में खलबली उठना जायज ही है।

लेकिन इस आरोपो से इतर सच्चाई जानना भी जरूरी है।
चूँकि मेरा कार्यक्षेत्र टैक्स,अर्थव्यवस्था,वित्तीय मामले तथा कॉरपोरेट मामले से जुड़ा हुआ है इसलिए मुझे इस सफेद झूठ को जनता के सामने बेनकाब करना जरूरी हो गया था।

इस लेख के माध्यम से में इस पूरे तथाकथित कर्ज माफी की सच्चाई बताना चाहूँगा।

जैसा कि आप सभी जानते है कि आप,हम या कोई कॉर्पोरेट बैंको से लोन लेता है तो उसकी एक प्रक्रिया होती है जिसमे संपत्तियां गिरवी रखी जाती है,कुछ गारंटी दी जाती है इत्यादि।

मुख्य रूप से बैंक जब पूर्ण रूप से संतुष्ट होता है तब ही लोन देता है।
लोन लेने के बाद सभी को नियमित रूप से ब्याज एवं मूलधन समय समय पर शर्तो के अनुसार चुकाना पड़ता है।

बैंको द्वारा दिया गया लोन बैंको के लिए संपत्ति यानी “Asset” होता है। अगर लोन आदि का भुगतान बैंक को समय पर प्राप्त होता रहता है उसे “स्टैंडर्ड एसेट”की श्रेणी में रखा जाता है।

लेकिन जब लोन लेने वाला समय पर किश्त,ब्याज आदि का भुगतान न करे तो ये “Asset” स्टैण्डर्ड न रह कर “Sub Standard” फिर “doubtful” फिर “loss asset” एवं अंत मे NPA यानी “Non performing Asset” की केटेगरी में रखा जाता है।

यानी स्टैण्डर्ड से NPA बनने में करीब 3-5 साल का या अधिक वक्त भी लग सकता है। तो क्या 2.4 लाख करोड़ जो NPA घोषित हुआ है ये कर्ज माफी है?

नही,ये कर्ज माफी नही बल्कि कर्ज वसूली की प्रक्रिया का पहला कदम होता है।
क्योंकि जबतक कोई लोन NPA नही बनता तब तक बैंक प्रभावी तरीके से लोन वसूल करने के कदम नही उठा सकते।

यानी अब इतना तो आप समझ चुके होंगे कि NPA बनने में करीब 3 से 5 साल का समय लगता है तथा NPA बनने के बाद ही बैंक प्रभावी तरीको से वसूली की प्रक्रिया शुरू कर सकते है।

यानी NPA घोषित होने कोई कर्ज माफी नही बल्कि कर्ज वसूली का रास्ता साफ करना है।

अब सवाल उठता है कि ये मोदी सरकार के कार्यकाल में 2014 के बाद लोन NPA बने वो किस सरकार के कार्यकाल में दिए होंगे?

निश्चित रूप से ये कांग्रेस की पूर्व सरकारों के कार्यकाल में दिए गए है तभी तो 3-5 साल के बाद मोदी सरकार में ये NPA हुए यानी वसूली के लिए घोषित हुए।

यानी सच्चाई तो कांग्रेस के दावों के बिल्कुल उलट है बल्कि स्थिति तो यह है की “उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे”।

वैसे भी इन सभी NPA की तह में जाया जाए तो सामने आएगा कि इनमें से कई लोन तो कांग्रेस सरकार और कांग्रेस से जुड़े नेताओ के दबाव में बैंको द्वारा दिये गए थे।

विजय माल्या को तो भरी संसद में कांग्रेस सरकार में प्रस्ताव पास कर के लोन दिलवाया गया था। नीरव मोदी और वीडियोकान समूह को भी बेतहाशा लोन देने का कार्य माँ बेटे की सरकार यानी कांग्रेस सरकार के समय हुआ।

तो आखिर खुद ही लोन दिलवा कर अपने गुनाहों के काले कारनामे आखिर कांग्रेस और राहुल गांधी मोदी सरकार के ऊपर क्यों मढ़ रहे है?

सच जानने के बाद कौन सच है कौन झूठ ये फैसला देश की जनता यानी आप सभी को करना है।

जय हिंद,वंदे मातरम।

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One Thought to “मोदी सरकार पर 2.4 लाख करोड़ के कर्ज माफ करने के आरोपों का सच।”

  1. Specific details not given, It’s also an emotional explanation a professional BJP worker. Real facts are in public, people know what is going on, suitable befitting reply will be given people only.

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