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ज़िंदगी के बेहद करीब है, ग़ालिब के ये शेऱ

दोस्तों बात अगर शायरी की हो और उसमे “मिर्ज़ा ग़ालिब” का ज़िक्र न हो तो ये शायरी की दुनिया के बादशाह से बेमानी होगी| मिर्ज़ा ग़ालिब और इश्क़ एक-दूसरे का पर्याय है| अगर हम यूं कहें कि इश्क गालिब से शुरू होता है तो यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं होगी। उनकी किताब “दीवान-ऐ-ग़ालिब” उर्दू साहित्य में सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताब है| मिर्ज़ा  ग़ालिब में एक गुरुर है|

पूछते है वो कौन है ग़ालिब?
कोइ बतलाए हमे की हम बतलाए क्या ?

यहाँ हम आपके के लिए ले कर आये है ग़ालिब के कुछ मरहफां शेर, शायद आपने ना सुने हो| तो लुत्फ़ उठाइए इन शेरों का|

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पर दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन,
दिल के खुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है

उनको देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक,
वो समझते हैं के बीमार का हाल अच्छा है

इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’,
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे

तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई
मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई

हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया पर याद आता है,
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता !

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

दोस्तों, ग़ालिब के ये शेऱ आपको कैसे लगे हमे कमेंट बॉक्स में लिख कर ज़रूर भेजे|

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ज़िंदगी के बेहद करीब है, ग़ालिब के ये शेऱ  ........India Alive
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ज़िंदगी के बेहद करीब है, ग़ालिब के ये शेऱ ........India Alive
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मिर्ज़ा ग़ालिब और इश्क़ एक-दूसरे का पर्याय है| अगर हम यूं कहें कि इश्क गालिब से शुरू होता है तो यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं होगी
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India Alive
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One Thought to “ज़िंदगी के बेहद करीब है, ग़ालिब के ये शेऱ”

  1. KUMAR PARTH

    शानदार

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