भारतीय इतिहास के महानायक पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री जी की पुण्य तिथि पर उनकी मौत से जुड़े रहस्यों का खुलासा
लाल बहादुर शास्त्री हिन्दुस्तान के स्वर्णिम इतिहास मे… एक ऐसा नाम ..एक ऐसा किरदार ..एक ऐसा व्यक्तित्व और एक ऐसा राजनेता जिसे आज किसी पद ,प्रतिष्ठा से नही बल्कि सादगी ,ईमानदारी व निर्णय क्षमता के आधार स्तम्भ के रूप मे जाना जाता है ।
आज वर्तमान मे भी हिन्दुस्तान की राजनीति मे कोई भी ऐसा राजनेता और राष्ट्रवादी किरदार दिखाई नही देता जो शास्त्री जी के चरित्र के इर्द गिर्द भी दिखाई देता हो क्योकि शास्त्री जी ने जो त्याग ,समर्पण और सादगी का उदाहरण एक आज़ाद राष्ट्र के रूप मे भारतवासियो के सामने रखा वो आज अतुलनीय है और यही कारण है कि शास्त्री जी 21बी सदी की युवा पीढ़ी के दिलो पर आज भी एक सफल व्यक्तित्व और एक श्रेष्ठ राष्ट्रवादी किरदार के रूप मे राज कर रहे है ।
जब शास्त्री जी ने प्रधान सेवक के रूप मे देश के दूसरे प्रधानमंत्री का पद संभाला तो एक नवीन राष्ट्र के रूप मे दायित्व का कुशलता पूर्वक पालन करना चुनोती पूर्ण था ।
लेकिन चुनोतियों का सहज भाव से सामना करना शास्त्री जी के खून व स्वभाव मे था और सायद इसलिए ही मात्र 16 साल की उम्र मे ही देश की आज़ादी के लिए अपने परिवार के विरुद्ध जाकर शिक्षा से त्याग पत्र देकर आज़ादी के लिए चलाये जा रहे आंदोलनों का हिस्सा बन देश की स्वतंत्रता मे अपनी शिक्षा की आहुति दे दी ।
लेकिन शास्त्री जी के व्यक्तित्व और निर्णय क्षमता की असल अग्नि परीक्षा तब हुई जब पाकिस्तान ने 1965 मे भारत के खिलाफ युद्ध छेड दिया लेकिन वो शास्त्री जी के उच्च मनोबल का कमाल ही था जिसने भारत वासियो के लिए एक टाइम अन्न का त्याग करने का आग्रह करना पसंद तो किया पर युद्ध भूमि से एक कदम भी पीछे हटना मंजूर नही किया जिसके परिणाम स्वरूप
पाकिस्तान मातृ भूमि के चरणों मे नतमस्तक होने पर मजबूर हो गया ।
साथ ही इस युद्ध ने 1962 चीन से मिली करारी हार के बाद भारतीय सेना के मनोबल को एक बार फिर ऊंचाइयों पर पहुँचाने का कार्य भी किया ।
लेकिन अफसोस कि इस शानदार व्यक्तित्व का ताशकण्ड के समझोते के दौरान रहस्यमय तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया जिसका रहस्य आज भी रहस्य के रूप मे ही हमारे सामने बना हुआ है ।
अगर हम आज शास्त्री के एक प्रधान मंत्री के रूप मे उनके कार्यकाल का तुलनात्मक अध्यन करे तो ये स्पष्टीकरण होता है कि अपने अल्प काल मे एक प्रधान मंत्री के तौर पर जो राष्ट्र हित के निर्णय शास्त्री जी ने लिए वो आज भी एक आम हिन्दुस्तानी को स्वाभिमान का अहसास कराते है ।
और आज ऐसे ही महान व्यक्तित्व और भारतीय राजनीति के एक महान किरदार का बलिदान दिवस है क्योकि आज ही के दिन शास्त्री जी को उनके द्वारा चलाये जा रहे परमाणु कार्यक्रम और भारत को महाशक्ति बनाने वाले प्रयासों के चलते अन्तराष्ट्रीय समुदाय द्वारा साजिश का शिकार बनाया गया जिसके चलते इस महानायक का अंत आज भी हमारे लिए रहस्य का विषय बना हुआ है !
ऐसे ही महान व्यक्तित्व और महान किरदार की पुण्य तिथि पर हम सभी भारतवासी अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते है



