स्टारडम को नहीं होने दिया हावी, जाने ‘फारुख शेख’ की ज़िंदगी से जुड़े कुछ तथ्य
दोस्तों,अपना बॉलीवुड भी कमाल का है। कहीं तो बॉलीवुड में इतनी चमक-धमक है कि बाहर से आने वाले हैं किसी शख्स की आंखें चौंधियाँ जाए, और कहीं बीते ज़माने का हीरो सड़को पर चाय बेचता हुआ या सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हुई पाया जाता है। लेकिन इस चमक-धमक के बीच भी कई सारे ऐसे कलाकार रहते हैं, जो स्टारडम के बावजूद सादा जीवन जीते हैं। फिल्मी दुनिया के उन्ही सितारों में से एक थे, ‘फारुख शेख’। ‘चश्मे बद्दूर’, ‘बाजार’, ‘उमराव जान’ जैसी फिल्मों से उन्होंने हमें अपने अभिनय का दीवाना बना दिया।
लेकिन गुजरात के बड़ौदा में जन्मे फारुख साहब पर सफलता कभी हावी नहीं हुई। वह पैसे से ज्यादा अपनी मर्जी के काम को अहमियत देते थे। अपनी जिंदगी में उन्होंने कई सारे लोगों की मदद की! कई बार तो किसी को बताया तक नहीं। ऐसा ही, एक किस्सा फिल्म चश्मे बद्दूर से मिलता है। जिसमें एक लाइट मैन छत पर लाइट लगा रहा था, इस दौरान वो अचानक से नीचे गिर गया और उसे काफी गंभीर चोटे आयीं। आनन-फानन में उस लाइटमैन को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसकी इलाज का पूरा खर्चा फारुख शेख साहब ने उठाया। यहां तक कि वह अपने व्यस्त शेडूल में से समय निकल कर रोज लाइट मैन से अस्पताल मिलने भी जाते थे।
फारुख शेख को, क्रिकेट बहुत पसंद था। स्कूल के दिनों से ही वे क्रिकेट खेलने के काफी शौकीन रहे थे। उनके इसी शौक की वजह से उन्हें सुनील गावस्कर के बहुत करीबी माना जाता था।
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