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तीन तलाक पर मात के बाद ओबेसी के बिगड़े बोल ..मुस्लिम महिलाओ को बताया पानी की मछली

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के सकारात्मक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने भी लोकसभा में प्रस्ताव पारित कर तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर नया कानून बनाते हुए मुस्लिम महिलाओ के सामने नववर्ष पर उपहार के रूप में नज़राना पेश किया तो मुस्लिम महिलाओ ने भी तीन तलाक की गुलामी से आज़ादी का जश्न व् ख़ुशी का इजहार करते हुए ‘सौ सुनार की एक लुहार की ‘ जैसे मुहाबरों को सत्यापित किया !

क्योकि सत्तर 70 साल की संबैधानिक व्यवस्था के दौर में भी ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ ‘ देश की संवैधानिक व्यवस्था को ठेंगा बताते हुए अपने घर का कानून या यूँ कहे कि मुस्लिम महिलाओ के शोषण के लिए उपयुक्त विकल्पों की खोज कर …महिलाओ के आत्मसम्मान पर निरंतर चोट कर उन्हें उन्ही की नज़रो में गिराने का अनुभव् कराता आ रहा था और जिसका अंत होना आज उतना ही जरूरी था जितना कि महिला सम्मान की रक्षा और प्रतिष्ठा के लिए रावण का वध !

लेकिन महिला सम्मान की जंग का हम इसे अंत नहीं कहेंगे वल्कि अपने सम्मान के लिए महिलाओ का जंग के मैदान में पदार्पण जरूर कहेंगे जिसमे उनके सामने रावण रुपी बुराई के रूप में मुस्लिम पर्सनल लॉ और ओवेसी जैसे कट्टरपंथी दुश्मन खड़े हुए है जिन्हे एक इंसान और मछली की जीवन शैली कोई फर्क दिखाई नहीं देता और जो केवल मुस्लिम महिलाओ को पानी की मछली के रूप में ही एक संकुचित कार्य क्षेत्र में ही देखना पसंद करते है या यूं कहे कि लोग मुस्लिम महिलाओ को केवल गुलाम के रूप में ही देखना पसंद करते है !

इसलिए में आज मुस्लिम महिलाओ से अपनी कलम के माध्यम से कहना चाहता हूँ कि अगर जंग के मैदान में कदम रख ही दिया है तो इसे अंत तक ले जाइये और मुस्लिम पर्सनल लॉ का पुरजोड़ विरोध करते हुए यूनिफार्म सिविल कोड मतलब एक देश एक कानून के मांग करते हुए अपने सम्मान और स्वाभिमान के पक्ष में मुस्लिम पुरुष के चार निकाह पर रोक और मुस्लिम महिलाओ को भी तलाक देने का अधिकार प्रदान करने के लिए भी सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाये

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