‘जल ही जीवन है’। लेकिन ये सिर्फ कहा जाता है, माना नहीं जाता।
आज “वर्ल्ड वाटर डे” पर हम बात करने जा रहे है उस मुद्दे पर, जिससे देश और दुनिया सबसे ज़्यादा जूझ रही है। जी हाँ, पानी!! ‘जल ही जीवन है’, ‘जल हमे बचाना है’, ‘जल हे भविष्य है’ इस तरह के कितने सारे स्लोगन आपने सुने होंगे। लेकिन ये सिर्फ कागजी स्लोगन है, असल ज़िंदगी में बहुत कम लोग है जो इस बात को मानते है।
जिस पानी की टोटी को हम सुबह ब्रश करता समय यही खुला छोड़ देते है, दुनिया के किसी कोने में, किसी इंसान की या जानवर की ,उतने से पानी की कमी से मौत हो जाती है। जितने पानी से हम अपनी गाड़ी धोते है, उतने से पानी में पूरा परिवार दो दिन तक अपनी प्यास बुझाता है।
जितने पानी में हम अपनी जीन्स को चार बार धोते है, उतने पानी से कम से कम 3-4 परिवार कुछ दिन तक पानी पी सकते है। लेकिन बात ये है की हमे ये सारी बातें मालूम है और समस्या ये है की हम सब-कुछ जानते हुए भी अनजान बने रहना चाहते है। हम सिर्फ एक उसूल पर काम करते है “अपना काम बनता, भाड़ में जाये जनता’।
लेकिन ये हक़ीक़त ज़्यादा दिन रहने वाली नहीं है।क्यकि जिस तेज़ी से दुनिया में पीने वाले पानी की कमी हो रही है। उस हिसाब से अगले कुछ सालो में हमे पानी भी पड़ोसी देशो से ख़रीदना पड़ेगा।
यहाँ हम आपको पानी की कमी से होने वाली कुछ ऐसी तस्वीरें दिखाने जा रहे है, जिसको देख कर शायद आपको ये एहसास हो जाए की जिस पानी को आप यूहीं बहा रहे है वो किसी की ज़िंदगी बचा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में सूखे खेतों के बीच इस कंगारू का कंकाल, पानी की कीमत का बखान इससे ज़्यादा नहीं कर सकता|

बिहार के इस किसान की लाचारी शायद हमे एक बार पानी का दुरूपयोग करने से रोकेगी।

महारष्ट्र के किसी गाँव की ये तस्वीर, जहाँ कोई औरत कहीं दूर रेगिस्तान से पानी भर कर ला रहे है


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