गौ रक्षको की हिंसात्मक कार्यवाही पर पीएम मोदी की टिप्पणी का डीएनए व् तुलनात्मक स्पष्टीकरण
गौ हत्या जी हाँ दोस्तों गौ हत्या ….ये अब वो मुद्दा बन गया है जिस मुद्दे पर आज राजनीति के मैदान में उपस्तिथ हर नेता फ्रंट फुट पर बैटिंग करना चाहता है नेता चाहे पक्ष का हो या विपक्ष का आज हर नेता इस मुद्दे को भुनाने में लगा हुआ है लेकिन इन सबके के बीच उस गौ रक्षक का क्या… जो कल तक बीजेपी का वोट बैंक हुआ करता था … बीजेपी के सत्ता में आने बाद आज उसी गौ रक्षक को गेंहू के साथ घुन की तरह सत्ता की चक्की में पीसा जा रहा है क्योकि कांग्रेस तो पहले से ही गौ रक्षको का विरोध कर किसी समुदाय विशेष के वोट बैंक के लिए गौ हत्या का निरंतर समर्थन करती आ रही है ….तो वही बीजेपी आलाकमान ने भी सत्ता में आने के बाद राजनीति के सुर बदल लिए है !
जिसके कारण सोशल मिडिया के सभी माध्यमों पर गौ रक्षक लगातार पीएम मोदी के निशाने पर है लेकिन इस पूरे घटना क्रम का अगर निष्पक्ष आंकलन किया जाए तो पीएम मोदी की गौ रक्षकों पर की गई नकारात्मक टिप्पणी राष्ट्र के एक जिम्मेदार प्रधानमंत्री व् प्रधान सेवक के दृष्टिकोण से बिलकुल सटीक और राष्ट्र धर्म का पालन करने वाली टिप्पणी कहा जा सकता है !
क्योकि राष्ट्र का प्रधानमंत्री उस एक परिवार के अभिभावक की तरह होता है जो दो पक्षों में झगड़ा होने जाने पर पहली डाँट पहली फटकार अपने पहले पक्षकार अपने बेटों को ही लगाता है और आज प्रधानमंत्री मोदी जी के सामने भी कुछ इसी तरह की असमंजस वाली परिस्तिथियाँ उत्पन्न हो रही है
लेकिन इस पूरे घटना क्रम को लेकर बीजेपी के आलाकमान द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओ पर प्रश्न चिन्ह लगाना भी आज हम लाजमी समझते है क्योकि कुछ बीजेपी शासित प्रदेशो में गौ हत्या और गौ वंश के विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बाबजूद गौ रक्षको द्वारा गौ तस्करो को गौ मांस के साथ प्रत्यक्ष रूप से पकड़ा गया है और प्रत्यक्ष रूप से पकड़ने के बाद अगर गौ रक्षक आक्रोश में आकर कोई कार्यवाही करते है तो उनके द्वारा की गई कार्यवाही की निंदा करने की जगह आपको अपनी प्रशासनिक व्यवस्था दुरुष्त करना चाहिए ताकि गौ रक्षको को ऐसा कोई मौका या अवसर उत्पन्न न हो जिसपर कि आपको गौ रक्षको की कड़ी निंदा करनी पड़े !



