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खुशखबरी! इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी माध्यम में भी होगी!!

हिंदी मीडियम के छात्रों के लिए ये बहुत बड़ी खुशखबरी है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी माध्यम में भी होगी। तकनीकी संस्थानों को इससे जुड़े कोर्सों को अब हिंदी माध्यम में भी पढ़ाने की स्वतंत्रता मिलेगी। सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है।

सरकार का मानना है कि, भाषा के दिक्कत की वजह से बड़ी संख्या में छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई से कतराते हैं। लेकिन अब इस पहल से छात्रों का इंजीनियरिंग के तरफ रूझान बढ़ेगा। सरकार ने इसे लेकर तकनीकी संस्थानों को सहूलियत दी है। साथ ही इसे प्रोत्साहित करने के लिए इंजीनियरिंग से जुड़ी किताबों को हिंदी में तैयार करने की भी पहल की है।

छात्रों का रूझान इंजीनियरिंग के प्रति बढ़ाने के लिए उठाया कदम
इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी माध्यम में कराने की यह पहल अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (एआईसीटीई) ने की है। सरकार से भी इसे मंजूरी मिल गई है। एआईसीटीई का मानना है कि यह पहल काफी पहले होनी चाहिए थी, लेकिन पाठ्य पुस्तकों की कमी के वजह से देर हुई। जिसे अब दूर करने की कोशिश की जा रही है।

इंजीनियरिंग से जुड़ी पुस्तकों को हिंदी में तैयार करने वाले लेखकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह जी ने इसी कड़ी में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबों को तैयार करने वाले लेखकों को पुरस्कृत भी किया।

हालाँकि संस्थानों पर इसके लिए कोई दबाव नहीं डाला जायेगा, बल्कि वह अपनी मर्जी से अपने संस्थान में पढ़ाई हिंदी या अंग्रेजी में से किसी भी माध्यम में कराने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।

सरकार के इस पहल से इंजीनियरिंग संस्थानों को उबरने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि मौजूदा समय में देश में इंजीनियरिंग संस्थान बड़ी संख्या में सीटों के खाली रहने के कारण बंद हो रहे हैं।

गौरबतल है कि तकनीकी शिक्षा से जुड़े आईआईटी और इंजीनियरिंग कॉलेजों का संचालन एआईसीटीई के नियमों के तहत होता है। इन्हे अपने यहां संचालित होने वाले किसी भी कोर्स को ए आईसीटीई से अनुमति लेनी जरूरी है।

 

 

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