केरल के सुप्रसिद्ध लेखक को मिली धमकी 6 महीने के अंदर इस्लाम कबूल करो, नहीं तो हाथ-पैर काट देंगे का लिखित डीएनए टेस्ट
अखलाक की मृत्यु पर अशांत असहिष्णु देश ने आज केरल मे हो रही निरंतर संघ के स्वयं सेवको और हिन्दू लेखको की हत्या पर शांति की लम्बी चादर औढ़ ली है क्योकि केरल मे मरने वाला कोई भी व्यक्ति विशेष मुस्लिम नही था या यूँ कहे कि मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के वोट बैंक का हिस्सा नही था 22 जुलाई को भी ऐसी ही एक घटना हमारे सामने आई है जिसमे केरल के सुप्रसिद्ध मलयाली लेखक केपी रामा नुन्नी को एक धमकी भरा पत्र अलकायदा से जुड़े किसी गुट के माध्यम से भेजा गया है जिसमे स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि छ: माह के अंदर इस्लाम कबूल करो नही तो हाथ पैर काट देंगे ये केरल का कोई एक मामला नही है ये तो मात्र एक उदाहरण मात्र है ।
लेकिन आज ये मंथन का विषय है कि अखलाक की मौत पर जो पत्रकार ,कलाकार,साहित्यकार लोकतंत्र के चश्मे पर असहिष्णुता का लेंस लगाकर देश की राजधानी मे घूम रहे थे विरोध के नारे लगा रहे थे पुरुस्कार वापिस लौटा रहे थे ।
आज उनके चश्मे से असहष्णुता के लेंस किसने उतार कर रख लिए कि आज उन्ही पत्रकारो ,कलाकारों और लेखको को केरल मे घटित कोई भी हिंसात्मक गतिविधि दिखाई नही दे रही है ।
अगर आप मेरे कथन व लेखनी पर भरोसा करे तो सत्य तो यही है कि सच मे वो लेंस किसी ने उतार कर रख लिए है अब लेंस उतारने वाला चीन भी हो सकता है और पाकिस्तान भी हो सकता है क्योकि सत्ता मे बैठी सरकार और संघ के मार्गदर्शन मे हिन्दुस्तान की बढ़ती ताकत ने इन दोनो का ही हाजमा बिगाड़ रखा है…. ऐसा मे नही कहता ऐसा तो खुद चीन कह रहा है हाल ही की एक रिपोर्ट मे चीन ने ये स्पष्ट कहा है कि भारत मे बढ़ता हिन्दू राष्ट्रवाद चीन के लिए खतरे की घण्टी है जिसे वो रास्ते से हटाने के लिए युद्ध के बहाने खोज रहा है और भारत को कमजोर करने के लिए सत्ता विरोधी दलो के नेताओ से अपने दूतावास पर बुलाकर मुलाकात कर रहा है राहुल गांधी जैसे नेता इस पूरे घटना क्रम के साक्षात उदाहरण भी है !
जो इस बात का स्पष्टीकरण करते है कि पुरुस्कार लौटाऊ गैंग के पत्रकारो,कलाकारों व लेखको के लोकतंत्र के चश्मे पर असहष्णुता के लेंस किसी और ने नही बल्कि चीन और पाकिस्तान से मिली फंडिंग के माध्यम से लगाये गए थे जिनका कार्य न्याय व अन्याय को देखना नही था बल्कि हिन्दू राष्ट्रवाद के विरोध के अवसरों को देख देश मे अराजकता माहोल उत्पन्न करना मात्र था ।
मेरा उद्देश्य अपनी कलम व लेखनी के माध्यम से उस आईने को दिखाना था जिसे आप कभी देखने मे समर्थ नही रहे अगर आज आप मेरी कलम के माध्यम से उस आईने को देखेंगे तो आपको अहसास होगा कि हमारा दुश्मन सीमा पार नही बल्कि हमारी सीमा के अंदर छुपे वो भेड़िये है जो चंद रुपये के पीछे अपने देश व अपनी ही पालनहार मातृ भूमि को नोच नोच कर खाने के लिए हमेशा तत्पर रहते है और जिनका राष्ट्रप्रेम व राष्ट्रहित की शब्दावली से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध कोई रिश्ता नही है ।

इसलिए ऐसे भेडियों से हमेशा सचेत रहे क्योकि घर की चोखट के बाहर से आ रहे सांप का मुँह(फन) कुचलना तो आसान होता है पर घर के ही अंदर किसी कोने मे छिपे सांप का मुँह ( फन) कुचलना कभी आसान नही रहता ।


