आतंकवाद के खिलाफ सहयोग मजबूत करेंगे भारत-इंडोनेशिया
विश्व के सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश भारत एवं इंडोनेशिया ने रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर सोमवार को सहमति जतायी। इसमें मुख्य जोर समुद्री क्षेत्र तथा आतंकवाद, उसके वित्त पोषण, धन शोधन एवं हथियार तस्करी से प्रभावी रूप से निबटने में सहयोग बढ़ाने के बारे में होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के बीच हुई वार्ता में प्रभावी विकास दर वाले इन दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने का निर्णय किया विशेषकर तेल एवं गैस, दवा, आईटी एवं कौशल विकास के क्षेत्र में।
बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़े शब्दों में भर्त्सना की तथा आतंकवाद की किसी भी हरकत को जरा भी बर्दाश्त नहीं किए जाने पर बल दिया।
दक्षिण चीन सागर विवादों का उल्लेख करते हुए दोनों देशों ने इस मुद्दे का शांतिपूर्ण माध्यमों एवं यूएनसीएलओएस (संरा समुद्र संबंधी कानून पर समझौता) सहित वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के अनुरूप समाधान निकाले जाने का आह्वान किया। दक्षिण चीन सागर विवाद में इंडोनेशिया भी एक पक्ष है।
सम्पर्क और लोगों के बीच परिचय बढ़ाने की आवश्कता पर बल देते हुए दोनों नेताओं ने इंडोनेशिया की एयरलाइंस गरूड़ के जकार्ता से मुंबई के बीच सीधी उड़ान शुरू करने के निर्णय का स्वागत किया। आतंकवाद से निबटने के मामले में संयुक्त बयान में आतंकवादी घोषित करने से संबंधित यूएनएससी प्रस्ताव 1267 और अन्य सम्बद्ध प्रस्तावों को लागू करने के लिए सभी देशों का आह्वान किया गया। यह आह्वान चीन द्वारा भारत के उस कदम को बाधित किये जाने को लेकर लक्षित है जिसमें जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को संरा द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाने का प्रयास किया गया था।
दोनों नेताओं ने सभी देशों से आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाहों एवं ढांचों को समाप्त करने, आतंकवादी नेटवर्कों एवं उनको धन मुहैया कराने के माध्यमों को बाधित करने तथा सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए काम करने को कहा गया है। सीमा पार आतंकवाद के माध्यम से पाकिस्तान की ओर संकेत किया गया है।

