उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग के नोटिस का दिया करारा जवाब
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में लोकसभा चुनाव प्रचार करते समय विपक्षी पार्टियों ने उन पर विवादित बयान देने की शिकायत चुनाव आयोग से की थी। जिसे चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए एक नोटिस योगी आदित्यनाथ को जवाब देने के लिए भेजा था। वहीं चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ पर 72 घंटे के लिए चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध मंगलवार से प्रारंभ था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब बहुत ही बेबाक अंदाज में अपने तरीके से दिया है।
आदित्यनाथ ने चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कभी धर्म और जाति के नाम पर वोट नहीं मांगा। एक दल की नेत्री खुद को धर्मनिरपेक्ष कहती हैं और फिर मजहब के नाम पर वोट मांगती हैं। क्या यह उचित है? उन्होंने यह भी कहा कि किसी को डर लगे या कोई अज्ञानता वश असुरक्षित महसूस करें। इसके कारण मैं अपनी आस्था को नहीं छोड़ सकता हूं। बजरंगबली में मेरी अटूट आस्था है। योगी आदित्यनाथ ने जवाब में विपक्षी पार्टियों पर यह आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियां धर्म और जाति के आधार पर वोट मांगती हैं।
दरअसल उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल का गठबंधन है। महागठबंधन ने देवबंद में अपनी रैली के दौरान कहा था कि मुसलमानों को एकजुट होकर वोट करना चाहिए। जिसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने अपने रैली में भाषण देते हुए कहा था कि यदि विपक्षी पार्टियों को अली पर विश्वास है तो बजरंगबली पर मैं भी विश्वास करता हूं। जिसके बाद चुनाव आयोग ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए मायावती पर 48 घंटे और योगी आदित्यनाथ पर 72 घंटे का चुनाव प्रचार के लिए रोक लगा दी थी। वहीं आजम खान और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर भी चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार के लिए रोक लगाई है।

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